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भावनात्मक बुद्धिमत्ता

भावनात्मक बुद्धिमत्ता क्या है?

भावनात्मक बुद्धिमत्ता क्या है

भावनात्मक बुद्धिमत्ता खुद की और दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखने, उन्हें समझने और उनकी सच्ची प्रेरणाओं, जरूरतों, उद्देश्यों और इच्छाओं को पहचानने की क्षमता है।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता (या संक्षेप में EQ) विकसित करने से आप दूसरों के साथ लबें समय तक के लिए मजबूत रिश्तें बना सकते हैं, आसानी से सभी तरह के लोगों के साथ एक जैसी रूचि का आधार ढूंढ सकते हैं, एक टीम का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर सकते हैं और इसकी बदौलत, कैरियर और निजी जीवन दोनों ही में शानदार उपलब्धियां प्राप्त कर सकते हैं। अत्यधिक भावनात्मक बुद्धिमत्ता भी तनावपूर्ण पस्थितियों और विवाद के समाधान के लिए सरल एवं उपयुक्त प्रतिक्रियाओं की अनुमति देती है, जबकि कम भावनात्मक बुद्धिमत्ता तनाव में बढ़ोतरी करती है और नकारात्मक घटनाओं से संबंधित प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता में कमी करती है। यही कारण है कि सभी नेतृत्व में एक EQ कौशल शामिल होता है, और एक लीडर की भावनात्मक बुद्धिमत्ता किसी भी क्षेत्र और विषय में पूरी टीम की सफलता की कुंजी होती है।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता की संरचना

अमेरिकी मनोवैज्ञानिक जे. मेयर और पी. सालोवी, जो आधुनिक EQ अवधारणा के खोजकर्ताओं में से हैं, उन्होंने भावनात्मक बुद्धिमत्ता की निम्नलिखित चार शाखाओं की पहचान की है, जो EQ कौशल के प्रयोग के चार क्षेत्रों का वर्णन करती है:

  • भावनाओं को स्पष्ट रूप से महसूस करने, आंकने और व्यक्त करने की क्षमता
  • प्रभावी निर्णय लेने के लिए खुद की और दूसरों में भावनाओं को जागृत करने की क्षमता
  • भावनात्मक अनुभूति और सहानुभूति की क्षमता
  • भावनाओं को प्रबंधित करने की क्षमता और किसी एक का बौद्धिक विकास।
  • इन सभी कौशलों का संयोजन भावनात्मक बुद्धिमत्ता का निर्माण करता है।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता के मॉडल्स

जे. मेयर और पी. सालोवी के मॉडल के अलावा, भावनात्मक बुद्धिमत्ता के दो और मुख्य मॉडल्स हैं जिन पर दुसरें मनोवैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने रोशनी डाली है:

डेविड गोलेमैन का भावनात्मक बुद्धिमत्ता का सिद्धांत- भावनात्मक बुद्धिमत्ता की अवधारणा को लोकप्रिय बनाने और इस अवधारणा को व्यापार और अलग- अलग पेशों से जोड़ने वाले के रूप में है, गोलेमैन ने पी. सालोवी और जे. मेयर की खोज वाले भाग में निजी विशेषताएँ जोड़ी। इस प्रकार, गोलेमैन का सिद्धांत QI के निम्नलिखित अतिरिक्त हिस्सों की पहचान करता है: आत्म-जागरूकता, आत्म-नियंत्रण, संबंध प्रबंधन और प्रेरणा को पहचानने की क्षमता है। गोलेमैन के अनुसार, ये वो गुण और उनका विकास है, जो किसी इंसान को उसकी भावनात्मक क्षमता का एहसास करने की अनुमति देते हैं।

रूवेन बार-ऑन का मॉडल- उन्होंने EQ की संरचना में निम्नलिखित हिस्सों को जोड़कर भावनात्मक बुद्धिमत्ता की क्षमताओं और व्यक्तित्व विशेषताओं के बीच के संबंध को मजबूत किया: भावनात्मक जागरूकता, आत्म-सम्मान, आत्म-बोध, आत्मविश्वास, स्वतंत्रता, सामाजिक जिम्मेदारी, सहानुभूति, लचीलापन, तनाव सहने की सहनशक्ति, दूसरों के साथ बातचीत का कौशल, और आशावाद।

बातचीत में भावनात्मक बुद्धिमत्ता

बातचीत में भावनात्मक बुद्धिमत्ता

भावनात्मक बुद्धिमत्ता को विशेष रूप से व्यापार और अलग-अलग पेशों, कैरियर डेवलपमेंट और बातचीत में अनिवार्य माना जाता है क्योंकि यह आपको इसकी अनुमति देता है:

  • इस बात को समझें कि आपका साथी क्या चाहता है और उनके साथ मिलकर आपसी फायदे वाला एक समझौता कैसे करें
  • अपनी भावनाओं को नियंत्रण में रखें और मनोवैज्ञानिक हेरफेर या चालाकी न करें
  • विवाद की स्थिति में अपने साथी को मनायें और उससे नज़दीकी बनायें
  • तनावपूर्ण पस्थितियों सहित किसी भी स्थिति में सबसे ज़्यादा फायदेमंद और सटीक निर्णय लें
  • दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ उत्पादक और मजबूत संबंधों का निर्माण करें
  • शब्दों, समय और बातचीत के लहजे पर ध्यान दें
  • बातचीत के दौरान उकसाने, अस्वीकार करने या विरोध करने पर उचित प्रतिक्रिया दें।

ऐसे में, एक अधिकारी की भावनात्मक बुद्धिमत्ता अनिवार्य है, यही कारण है कि आज EQ प्रशिक्षण बहुत अधिक मांग में है। इसलिए, आज बच्चों में भावनात्मक बुद्धिमत्ता का विकास शिक्षा में एक विशेष मायने रखता है।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता की जाँच

अपने भावनात्मक बुद्धिमत्ता के स्तर की जाँच करने के लिए, सवाल-जवाब की छोटी प्रतियोगिता में भाग लें। फिर, अपने जीवन के अलग-अलग हिस्सों के बारे में बताने वाली हर स्थिति का आंकलन करें। ऐसा करने के लिए, अपने आंकलन के आधार पर हर परिस्थिति के सामने कुछ अंक दें:

  • बहुत ज़्यादा असहमत (-3 अंक)
  • काफी हद तक असहमत (-2 अंक)
  • आंशिक रूप से असहमत (-1 अंक)
  • आंशिक रूप से सहमत (+1 अंक)
  • कुलमिलाकर सहमत (+2 अंक)
  • पूरी तरह से सहमत (+3 अंक)।

यहाँ कुछ कथन हैं:

1. मैं नकारात्मक भावनाओं से नहीं बचता क्योंकि मेरे लिए वो उतनी ही ज्ञानवर्धक हैं जितनी कि सकारात्मक है।

2. नकारात्मक भावनाएं उपयोगी होती हैं क्योंकि वो मुझे यह समझने में सहायता करती हैं कि मुझे खुद के स्वभाव में क्या बदलाव लाने या सुधार करने की ज़रूरत है।

3. मैं किसी बाहरी प्रभाव या दबाव में नहीं हूँ।

4. जब मेरा मन बदलता है तो मैं उस पर ध्यान देता हूँ।

5. मैं आसानी से ध्यान अपना केंद्रित कर सकता हूँ और ज़रूरत पड़ने पर अपनी भावनाओं पर नियंत्रण कर सकता हूँ।

6. जरूरत पड़ने पर मैं खुद को ख़ुश करने वाली या उत्साहित करने जैसी सकारात्मक भावनाओं को जागृत कर सकता हूँ।

7. मैं इस बात पर नज़र रखता हूँ कि मैं कैसा महसूस कर रहा हूँ और मैं क्या अनुभव कर रहा हूँ।

8. मुझे असफलता से उबरने में समय नहीं लगता, क्योंकि मैं नकारात्मक भावनाओं को समाप्त कर सकता हूँ।

9. मैं दूसरे लोगों की समस्याओं को बड़े ध्यान से सुनता हूँ।

10. मैं अपनी असफलताओं को अपने दिमाग में जगह नहीं देता और उन पर ध्यान नहीं देता।

11. मैं हमेशा आसानी से ये समझ जाता हूँ कि सामने वाले इंसान को भावनात्मक रूप से क्या चाहिए।

12. मैं लोगों की भावनाओं को शांत करने और आश्वस्त करने में अच्छा हूँ।

13. मैं अपनी नकारात्मक भावनाओं को दूसरे लोगों पर नहीं थोपता हूँ।

14. मैं जोखिमों और उभर रहे मुद्दों का आकलन करने में अच्छा हूँ।

15. अगर समय मिले तो मैं बैठकर अपनी नकारात्मक भावनाओं का विश्लेषण करता हूँ।

16. तनावपूर्ण स्थिति से गुज़रने के बाद मैं जल्दी ही शांत हो सकता हूँ।

17. यह समझने के लिए कि सामने वाला इंसान क्या महसूस कर रहा है, मुझे सिर्फ़ थोड़ी देर के लिए उसकी जांच पड़ताल, बातचीत करने की ज़रूरत होती है।

18. मैं चेहरे के भावों को देखकर भावनाओं को पहचानने में माहिर हूँ।

19. अपनी भावनाओं को समझने से मुझे खुद को सतर्क करने और क्षमतावान बनाये रखने में मदद मिलती है।

20. मैं दूसरे लोगों के स्वभाव को पहचानने और अपनाने में माहिर हूँ।

21. अक्सर मुझसे व्यक्तिगत मुद्दों और रिश्तों के बारे में सलाह मांगी जाती है।

अपने भावनात्मक बुद्धिमत्ता के हिस्से को खोजने के लिए अपने जवाबों के आधार पर अपने अंक जोड़ें। उदाहरण के लिए, अगर आपके पास कुल प्राप्त अंक 70 या उससे ज़्यादा है, तो आपके पास उच्च स्तरीय बुद्धिमत्ता है। दूसरी ओर, अगर आपके पास कुल प्राप्त अंक 40-59 है, तो आपकी बुद्धिमत्ता औसत स्तर की है; अगर आपके कुल अंक 39 या उससे कम है, तो आपके पास EQ का निम्न स्तर है।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता कैसे विकसित करें

भावनात्मक बुद्धिमत्ता कैसे विकसित करें

भावनात्मक बुद्धिमत्ता संबंधी अभ्यास बच्चों और बड़ों की भावनात्मक बुद्धिमत्ता को विकसित करने में सहायता करते हैं। वे प्रीस्कूल के बच्चों के लिए भी प्रासंगिक हैं क्योंकि आप उसका इस्तेमाल उन्हें सीखाने के लिए खेल के रूप में कर सकते हैं।

अभ्यास 'भावनाओं का शब्दकोश '

आपके लिए भावनाओं को महसूस करना, उन पर ध्यान देना और उनकी आसान पहचान के लिए, आपको पहले उनका नाम रखना सीखना चाहिए और समझना चाहिए कि वो कैसे एक दूसरे से अलग हैं। ऐसा करने के लिए, एक ख़ास नोटबुक लें और पांच से सात मूल भावनाओं - डर, गुस्सा, खुशी, आश्चर्य, नफ़रत, उदासी और शर्म - को ज़्यादा जटिल और विस्तारवादी भावनाओं में बाँटें। उदाहरण के लिए, आप उदासी को "दुःख," "इच्छा," "उदासीनता," "नाराज़गी," "निराशा," आदि की श्रेणियों में बाँट सकते हैं।

हर भावना के आगे, लिखिये कि उसकी शारीरिक अभिव्यक्तियाँ- क्या हैं। ऐसा करने के लिए, याद रखें कि जब आप उन भावनाओं का अनुभव करते हैं तो आप कैसा महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपको चोट लगती है - गले में एक गांठ, छाती में जलन, आंखों से पानी गिरने की समस्या आदि होती है। फिर उन स्थितियों को लिखें जिनमें आप इन भावनाओं को व्यक्त करते हैं। उदाहरण के लिए, गुस्सा आने की स्थिति तब होती है जब कोई दोस्त सिनेमा देखने जाने से मना कर देता है।

यह "शब्दकोश" एक दिन में नहीं भरा जा सकता है - भावनाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी जुटाने और उन्हें एक साथ जोड़ने में समय लगेगा। अगर आप अचानक एक ऐसी भावना की खोज करते हैं जिसका नाम आप नहीं जानते हैं, तो उसे खुद से एक नाम दें और बाकी भावनाओं की जाँच करें जिनके साथ वो मिलतीजुलती है।

व्यायाम 'अंशांकन'

मनोविज्ञान में, "अंशांकन" यानी (जांच और समायोजन करने की क्रिया) जैसी परिभाषा है। इसका मतलब होता है बिना शब्दों के किसी की भावनात्मक स्थिति को निर्धारित करने के लिए बातचीत कर रहे एक व्यक्ति के बाहरी संकेतों यानी हावभाव को पढ़ना। उदाहरण के लिए,अगर कोई इंसान ऑफिस से बाहर निकलते समय दरवाज़े को ज़ोर से पटकता है, तो वो इंसान बहुत ज़्यादा गुस्से में है। इस अभ्यास का उद्देश्य अवलोकन के लिए विषय के तौर पर एक या दो लोगों को चुनते हुए, एक सप्ताह में इस तरह की घटनाओं की पड़ताल करना है। उनकी भावनाओं में बदलाव को समझने के लिए देखें और इशारों, चेहरे के भाव, चाल, बोलने के तरीके आदि में वे कौन से शारीरिक संकेत प्रदर्शित करते हैं। खुद से लगातार पूछें: "यह इंसान अभी क्या महसूस कर रहा है?" "आप उन भावनाओं को क्या कहते हैं?" जब कोई नयी भावना जन्म लेती है जिसे आपने पहले कभी महसूस नहीं किया है, तो उस इंसान के हावभाव और चेहरे के भावों को लिखने या यहाँ तक ​​कि उसकी तस्वीर बनाने की कोशिश करें।

अभ्यास 'इमोशनल डायरी'

भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ाने का एक प्रभावी तरीका है एक डायरी में अपने द्वारा अनुभव की जाने वाली सभी भावनाओं को संजोकर रखना। यह अभ्यास पहले वाले (भावनात्मक मानचित्र) के लिए एक शानदार सहायक है। हम सलाह देते हैं कि आप डायरी में लिखने के लिए एक ख़ास समय समर्पित करते हुए एक दैनिक नियम बना लें। ऐसा करने का सबसे अच्छा समय शाम का है, जब आप चुपचाप दिन के दौरान आपके साथ हुई सभी ख़ास घटनाओं के विषय में लिख सकते हैं। आप 'यहाँ और अभी' डायरी का इस्तेमाल तब भी कर सकते हैं जब आप विशेष रूप से शक्तिशाली भावनाओं का सामना कर रहे हों और उन्हें नियंत्रित करने के लिए ब्रेक लेना चाहते हों।

आप अपनी पसंद की किसी भी भाषा/शब्दावली में अपनी भावनाओं को लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए, "आज सुबह मैं बहुत अच्छे मूड में था, लेकिन जब किसी ने बस में मेरे पैर पर अपना पैर रख दिया, तो मैं दोपहर के खाने के समय तक गुस्से में और चिड़चिड़ाया हुआ था। फिर मैंने अपना पसंदीदा सैंडविच खाया और अच्छा महसूस किया।

भावनात्मक बुद्धिमत्ता को बढ़ावा देने का एक और बहुमुखी तरीका एक विशेष कोर्स करना या उस विषय से जुड़ी किताबें पढ़ना है, जो ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं।

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