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पार्श्व सोच या लेटरल थिंकिंग

पार्श्व सोच क्या है?

पार्श्व सोच क्या है

"पार्श्व" यानी लेटरल शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से लैटिन भाषा के "लेटरलिस" शब्द से हुई है, जिसका अर्थ है "किसी लक्ष्य के अलग-अलग पहलुओं से संबंधित होता है।" पार्श्व सोच को कभी-कभी "अलग सोच" भी कहा जाता है। यह सोचने के पारंपरिक तरीके से अलग होती है क्योंकि इसका ध्यान दूसरे, सबसे अप्रत्याशित या अस्पष्ट लक्ष्यों पर केंद्रित हो जाता है। आसान शब्दों में, पार्श्व सोच हमें किसी समस्या को उसके अस्पष्ट दृष्टिकोणों से देखने और उन दृष्टिकोणों के माध्यम से रचनात्मक समाधान निकालने की अनुमति देती है।

सन 1967 में मनोवैज्ञानिक एडवर्ड डी बोनो ने "लेटरल थिंकिंग" शब्द गढ़ा था। अपनी क़िताब "लेटरल थिंकिंग: एन इंट्रोडक्शन" में, एडवर्ड डी बोनो ने तार्किक सोच की तुलना पार्श्व सोच के साथ की। तार्किक सोच के साथ, हम प्रमाणित कारणों और संरचना से एक उचित निष्कर्ष निकालते हैं, पार्श्व सोच के साथ, हम तर्क के नियमों या सिद्धांतों द्वारा खुद को सीमित नहीं करते हैं। इस तरह, एक अलग पार्श्व तर्क जन्म लेता है।

पार्श्व सोच का दायरा

एडवर्ड डी बोनो के नज़रिये से, पार्श्व सोच उन सवालों के जवाब के तौर पर उभरी है जिनका जवाब आप तार्किक सोच या किसी दूसरे प्रकार की सोच के ज़रिये नहीं दे सकते (और उनकी एक बहुत बड़ी संख्या है)। यही कारण है कि पार्श्व सोच के प्रयोग का दायरा अविश्वसनीय रूप से बहुत बड़ा है। सबसे पहले, यह नये उत्पाद के निर्माण के लिए प्रासंगिक है, जब बाज़ार और वर्तमान दर्शकों संबंधी नये सिरे से विचार करना ज़रूरी होता है ताकि स्वतंत्र विषयों या व्यापारिक प्रगति के अवसरों को खोजे जा सकें। साथ ही, बजट की योजना बनाने में पार्श्व सोच बहुत ही बेहतर ढंग से काम करती है जब आपको उसे आवंटित करने के बेहतर तरीके खोजने की ज़रूरत होती है।

चूंकि पार्श्व सोच का अर्थ है अपनी क्षमता  के दायरे के बाहर निकलकर सोचना, यह उन स्थितियों के लिए उपयुक्त है जहाँ नये और प्रासंगिक विचारों की ज़रूरत होती है। इसे पीआर से लेकर एसएमएम और सेल्स तक किसी भी पेशे में लागू किया जा सकता है। जूनियर विशेषज्ञ और अधिकारी दोनों ही अपनी टीमों को रणनीति समझाते समय इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। पार्श्व सोच एक ऑनलाइन कोर्स तैयार करने में मदद करेगी, उदाहरण के लिए, आप छात्रों को अनौपचारिक और संवादात्मक अभ्यासों के साथ जोड़ना चाहते हैं। आप यह भी कह सकते हैं कि पार्श्व सोच की विशेषताएं श्रम बाजार में एक आधुनिक और मांग वाले पेशे के तौर पर उभर रही है।

पार्श्व सोच के तरीके

पार्श्व सोच के तरीके

आप कई तरह के पार्श्व सोच के तरीके खोज सकते हैं, लेकिन यहाँ सबसे प्रभावशाली हैं:

1. सिक्स थिंकिंग हैट्स तकनीक

यह विधि विचार-मंथन पद्धति की तरह है, लेकिन इसके विपरीत, इसमें सभी तरह के विचारों का विश्लेषण करना शामिल है, चाहे वो विचार कितना भी बकवास क्यों न हो, जो विरोधाभासी रूप से, समाधान खोजने को बहुत सरल और ज़्यादा प्रभावी बनाता है। आपको छह अलग-अलग रंग की टोपियाँ लेनी है या उनकी कल्पना करनी है, जो एक समूह में एक प्रतिभागी से दूसरे प्रतिभागी के पास जायेगी, इस तरह सभी के विचारों को पुनर्निर्देशित यानी नई दिशा की और ले जाने के लिए प्रेरित करेगी और उन्हें अलग -अलग दृष्टिकोणों से चर्चा के विषय को समझने की अनुमति देगी। हर टोपी समझने के एक अलग दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करती है, अर्थात्:

  • सफेद टोपी सूचनात्मक होती है। इस टोपी को पहनने वाला प्रतिभागी तथ्यों और आंकड़ों को सूचीबद्ध करता है और सामान्य जानकारी प्रदान करता है: हमारे पास क्या है, क्या नहीं है, आपको क्या सोचने की ज़रूरत है आदि।
  • लाल टोपी भावुक होती है। इस टोपी को पहनने वाला प्रतिभागी समस्या से संबंधित किसी भी तरह के अहसासों और भावनाओं की निगरानी करता है और उनके अंतर्ज्ञान को सुनता है।
  • हरी टोपी रचनात्मक होती है। इस टोपी को पहनने वाला प्रतिभागी सबसे साधारण समाधान से लेकर सबसे अपरंपरागत समाधान तक नये विचार और सुझाव का सृजन करता है।
  • काली टोपी महत्वपूर्ण होती है। इसे पहननें वाला प्रतिभागी हर विचार के बारे में अपना संदेह व्यक्त करता है और उसके लागू होने से जुड़ी कमियों और चुनौतियों का मूल्यांकन करता है।
  • पीली टोपी आशावादी होती है। इसे पहननें वाला प्रतिभागी चर्चा के तहत विचार के लाभ और विशेषताओं और उनके लागू होने के सकारात्मक पहलुओं पर विचार करता है।
  • नीली टोपी संगठनात्मक होती है। ये है फैसिलिटेटर की टोपी होती है, जो बाकी प्रतिभागियों द्वारा कही गयी हर बात का सार प्रस्तुत करता है और उनके अनुमानों और पार्श्व सोच-विचारों को संजोकर रखता है जो उपयोगी हो सकते हैं।

यहाँ बताया गया है कि यह प्रक्रिया व्यवहारिक रूप से कैसे काम करती है। सबसे पहले, कोई भी प्रतिभागी कोई भी टोपी लगा सकता है। फिर, वे टोपी के रंग द्वारा दर्शाई गयी दिशा के अनुसार अपने विचार व्यक्त करता है। आखिर में, प्रतिभागी या तो इन टोपियों को प्रक्रिया के दौरान अदला-बदली कर सकते हैं या उन्हें "एक बैठक, एक टोपी वितरण" प्रारूप यानी वन मीटिंग वन हैट डिस्ट्रीब्यूशन फ़ॉर्मेट के अनुसार पहन सकते हैं।

2. सिंथेटिक्स

मनोवैज्ञानिक बोनो के अनुसार, जो इस पद्धति (साथ ही सिक्स थिंकिंग हैट्स तकनीक) के लेखक हैं, सिंथेटिक्स के समान तरीके सोचने के मौजूदा रुढ़िवादी समझ को ख़त्म कर सकते हैं। इसके अलावा, उनका इस्तेमाल करके, आप समस्या को इस तरह से देख सकते हैं कि वे सही निर्णय लेने में हस्तक्षेप न करें। ऐसा करने के लिए, आपको चाहिए:

  • अपनी समस्या का जितना हो सके कम से कम शब्दों में वर्णन करें, सिर्फ़ दो से तीन शब्दों या तकनीकी परिभाषा का इस्तेमाल करें।
  • वर्णन करें कि लोग कैसे अक्सर इस तरह की समस्याओं का समाधान करते हैं।
  • अपने आप को किसी ऐसे व्यक्ति की जगह पर रखें जो समस्या को गैर-मानक तरीके से हल करना चाहता है, लेकिन एक अलग किरदार में (उदाहरण के लिए, एक ग्राहक, खरीदार, विक्रेता, या कोई ऐसा इंसान बनकर जो आप नहीं हैं) ।
  • कल्पना कीजिये कि कोई काल्पनिक किरदार या ऐतिहासिक किरदार समस्या का समाधान कैसे करेगा।

3. एक क्रमहीन शब्द

जब चर्चा समाप्त हो जाये तो इस तकनीक का प्रयोग करें। उदाहरण के लिए, आप इसे उन मामलों में टॉकिंग हैट्स तकनीक के साथ जोड़ सकते हैं जहाँ प्रतिभागियों के पास अब नये विचार नहीं हैं या वे एक जैसे विचार तक नहीं पहुंच सकते हैं। मॉडरेटर को सभी टीमों के सभी सदस्यों से उनके दिमाग में आये एक क्रमहीन शब्द का नाम देने के लिए कहें। फिर हर उस कहे गये शब्द को उस समस्या से जोड़ने की कोशिश करें जिसका समाधान आप कर रहे हैं। चर्चा के दौरान, पहले से चुने गये विषयों के संबंध में नये कार्य क्षेत्र और विचार जन्म ले सकते हैं।

4. अतिरिक्त मील जाना ज़्यादा मेहनत करना

अक्सर लोगों के पास सीमित समय, बजट या बाकी संसाधन होते हैं। लेकिन क्या होगा अगर उनके साथ इस तरह की बंदिशें नहीं हों? कल्पना कीजिये कि अगर कोई वजह आपका पीछे से समर्थन नहीं करती है तो आप समस्या का समाधान कैसे करेंगे। एक बार जब आप विचारों की एक सूची तैयार कर लेते हैं, तो सोचें कि आप उन्हें मौजूदा संरचना में शामिल  करने के लिए कैसे ढाल सकते हैं, भले ही कुछ रियायतों के साथ।

ये सभी पार्श्व सोच विधियां आपके प्रयोग के क्षेत्र और आपके पेशे की परवाह किये बिना आपकी मदद करेंगी।

लेटरल थिंकिंग एल्गोरिथ्म

लेटरल थिंकिंग एल्गोरिथ्म

मार्केटर फिलिप कोटलर ने एडवर्ड डी बोनो द्वारा पेश किये सिद्धांत का इस्तेमाल सिर्फ़ तीन चरणों में पार्श्व सोच का इस्तेमाल अपने सार्वभौमिक एल्गोरिदम तैयार करने के लिए किया:

  1. फोकस चुनें- आपको उस समस्या के प्रति निर्णय लेने की ज़रूरत है जिस पर आप विचार करेंगे और सिर्फ़ उसी पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह शुरुआती मुद्दा है; किसी भी विचार को उसके समाधान के बिना लागू करना असंभव है। इसलिए, आपको विभिन्न दृष्टिकोणों से इसका विश्लेषण करने की ज़रूरत है।
  2. चलन को बदले- उसके बाद, क्रियाओं के सामान्य क्रम और निर्मित विचार के तर्क को बदलना ज़रूरी है। स्वीकृत मानकों से उस दिशा की ओर कदम बढ़ायें जो बाहर से मूर्खतापूर्ण लगे। अगर आपको लगता है कि आप थोड़ी अविश्वसनीय बेवकूफी के बारे में सोच रहे हैं या सुझाव दे रहे हैं, तो कोई बात नहीं – इसे ऐसा ही होना चाहिए।
  3. तार्किक संबंध स्थापित करें- अब आपको अपने दूसरे बेतुके सुझाव को तर्कसंगत बनाने की जरूरत है। यह सबसे कठिन कदम है, जिसमें समय और रचनात्मकता की ज़रूरत होती है, जो एल्गोरिथ्म को पूरा करते हैं और आपको मनपसंद नतीजें पाने की अनुमति देते है। इस बारे में सोचें कि आप अपने मूर्खतापूर्ण विचार को मौजूदा परिस्थितियों में कैसे ढाल सकते हैं, उसे नरम कर सकते हैं, वो भी सार को बनाये रखें हुए।

यह पार्श्व सोच योजना गतिविधि के किसी भी हिस्से में सही से लागू होती है।

पार्श्व सोच की पहचान करना और विकसित करना

तो, आप पार्श्व सोच कैसे विकसित करते हैं? इसमें महारत हासिल करना आसान नहीं है, इसलिए अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो चिंता न करें। इसके बजाय, इन तरीकों को अपने जीवन में शामिल करें और नियमित रूप से इनका अभ्यास करें:

  • अपने दांतों को ब्रश करने से लेकर किसी तरह की कागज़ी कार्रवाई करने तक, किसी भी आदतन कम के लिए एक नया दृष्टिकोण खोजें।
  • अपने सामान्य चलन और समाधानों की आलोचना करें, भले ही आप उनसे खुश हों।
  • रचनात्मक गतिविधियों के लिए समय निकालें, एक रचनात्मक शौक पालें।
  • पुरानी चीजों और औजारों को नये तरीके से इस्तेमाल करने कोशिश करें.
  • चिंतन और नये विचारों की खोज के लिए अलग समय तय करें।

पार्श्व सोच विकसित करने के लिए आप निम्नलिखित तकनीकों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • आप जो कुछ भी देखते हैं, क्या आप उनके बारे में अजीबो-गरीब और अलग विचार सीचते हैं। आप इसे एक नियमित अभ्यास में बदल सकते हैं: इंटरनेट पर किसी भी तस्वीर को खोलें और इसे कैसे बनाया गया है, इस पर एक मूल बैकस्टोरी सोचें।
  • एक्सपेरिमेंट करने का निर्णय लें। यहां तक कि छवि का परिवर्तन भी सोच की रूढ़ियों का विनाश है, जो स्वयं की आंतरिक भावना को बदलने में मदद करता है, और इसका अर्थ होता है, व्यवहार का मॉडल। इसमें वे चीजें करनी भी शामिल होती है जो आपने पहले नहीं की थीं। उदाहरण के लिए, अकेले सिनेमाघर फिल्म देखने जाना।

पार्श्व सोच संबंधी चुनौतियां

चूंकि पार्श्व सोच रचनात्मक सोच है, आपको इसके लिए अतिरिक्त समय निकालने की भी ज़रूरत है, जो आपको आपके समय सीमा को पूरा करने से रोक सकती है। इसके अलावा, पार्श्व सोच आपको 'एकमात्र सही समाधान' की गारंटी नहीं दे सकती है, क्योंकि इसका उद्देश्य आपकोमौलिक दृष्टिकोण खोजने में सहायता करना है, न कि सबसे अच्छा। इसका मतलब, पार्श्व सोच जोखिम से भरी है, विशेषकर यदि आप कोई गलती करते हैं तो आप कुछ खो सकते हैं। कभी-कभी, नतीजे का फायदा लेने के लिए एक अपरंपरागत दृष्टिकोण की कीमत पर सदाबहार तार्किक सोच को चुनना बेहतर होता है।

पार्श्व सोच संबंधी उदाहरण

पार्श्व सोच संबंधी उदाहरण

पार्श्व सोच का एक मुख्य उदाहरण लेटरल मार्केटिंग है। पारंपरिक मार्केटिंग के विपरीत, जो मौजूदा ऑफर्स को बेहतर बनाने पर केंद्रित है, लेटरल मार्केटिंग का उद्देश्य पुराने ऑफर्स के आधार पर नये ऑफर्स का निर्माण करना है। उदाहरण के लिए, रेडीमेड फ्रोज़न पिज्जा जिन्हें आप माइक्रोवेव में पका सकते हैं या जिनको आप फ़ूड डिलीवरी की तरह डिलीवर कर सकते हैं। पहले मामले में, टीम इस सवाल का जवाब देकर इस आईडिया पर पहुंची होगी, "लोग पिज्जा कैसे खा सकते हैं अगर वे खाना बनाना और रेस्टोरेंट नहीं जाना चाहते हैं?" और दूसरे मामले में, वे इस सवाल का जवाब दे सकते थे: "अगर उनके पास खाना नहीं है और घर छोड़कर जाने का कोई विकल्प नहीं है तो लोग कैसे नाश्ता कर सकते हैं?"

पार्श्व सोच संबंधी अभ्यास (उत्तरों के साथ)

कृपया समस्याओं को स्वयं हल करने से पहले उनके उत्तरों को न पढ़ें!

एडवर्ड डी बोनो से कार्य

एक साहूकार पैसे के लिए कर्ज़दार के पास आया है, लेकिन कर्ज़दार के पास लौटाने के लिए पैसे नहीं है और जल्द ही उसके पास पैसे होंगे भी नहीं। फिर साहूकार, कर्ज़दार को बताया गये सौदे की पेशकश करता है: वो दो पत्थरों को एक बोरी में डाल देगा, एक काला और एक सफेद। अगर कर्ज़दार की बेटी सफेद पत्थर खोज लाये तो कर्ज़ माफ होगा। काला पत्थर खोजने पर भी कर्ज़ माफ़ हो जायेगा, लेकिन तब लड़की को साहूकार से शादी करनी होगी। जबकि, अगर कर्ज़दार और उसकी बेटी भाग लेने से इनकार करते हैं, तो साहूकार उनकी संपत्ति जब्त कर लेगा।
कर्ज़दार मान गया। फिर साहूकार रास्ते में झुककर दो पत्थर उठाता है, लेकिन लड़की ने ध्यान दिया कि साहूकार धोखा कर रहा है: दोनों पत्थर काले हैं।

नफरत भरे साहूकार से शादी करने से बचने और अपने पिता को उसके कर्ज़ से छुटकारा दिलाने के लिए लड़की को क्या करना चाहिए?

जवाब: कोई सही जवाब नहीं है, क्योंकि इस चुनौती का उद्देश्य रचनात्मक सोच विकसित करना है, जहाँ मुख्य लक्ष्य  कर्ज़दार और उसकी बेटी के लिए सुखद नतीजे के साथ कहानी का अंत करना है। हालांकि, एडवर्ड डी बोनो निम्नलिखित जवाब देने का सुझाव देते हैं: लड़की को बैग से एक पत्थर निकालना चाहिए, दूसरे के रंग की परवाह किये बिना। फिर, तुरंत  उसे समान पत्थरों के ढेर में गिरा देना चाहिए और साहूकार को थैली से दूसरे पत्थर को निकालकर दिखाने की पेशकश करनी चाहिए। आखिर अगर अब काला पत्थर ही निकालता, तो इसका मतलब ये होता कि लड़की ने पहले गलती से सफेद पत्थर गिरा दिया था। ऐसे में साहूकार अपने दिये धोखे को कबूल करने की हिम्मत नहीं करेगा।

पहेलियाँ

  • एक कैफे में एक ग्राहक ने एक कप कॉफ़ी का ऑर्डर दिया, लेकिन तभी उसे कॉफ़ी में एक मक्खी तैरती हुई मिली। उसने वेटर को बुलाया और कॉफी बदलने को कहा। जब वेटर कॉफ़ी का नया कप लेकर आया, तो ग्राहक ने दावा किया कि यह वही कॉफ़ी है। उसने कहा कि वेटर ने मक्खी को निकाला दिया है और उसी कॉफ़ी को दूसरे प्याले में डाल दिया है। ग्राहक ने इसका पता कैसे लगाया?
    जवाब: कॉफी में मक्खी मिलने से पहले ग्राहक के पास कॉफी में चीनी मिलाने का समय था।
  • एक कोयला खदान से दो मजदूर रेंगते हुए बाहर निकले। जब वे रोशनी में आये, तो पता चला कि उनमें से एक का चेहरा बिल्कुल साफ था, जबकि दूसरे का चेहरा काला हो गया था। हालांकि, जिसका चेहरा साफ था, वो मुँह धोने चला गया। क्यों?
    जवाब: जिसका चेहरा साफ था, उसने अपने दोस्त की ओर देखा और सोचा कि चूंकि उसके दोस्त का चेहरा काला गंदा हो गया है, तार्किक रूप से, उन दोनों का काला, गंदा होना चाहिए। और जिसका चेहरा गंदा और काला हो गया था, उसने अपने दोस्त का साफ चेहरा देखा और उसके विपरीत सोचा।
  • लोगों से भरे हुए एक घर के सामने बीस शानदार संगीतकार गा बजा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई नहीं सुनता। क्यों?
    जवाब: वे लोग बास्केटबॉल खेल रहे हैं, और लोग उन्हें देख रहे हैं, सुन नहीं रहे हैं।

यदि आपको किसी विषय को गहराई से जानने की इच्छा या ज़रूरत है, तो एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम या पार्श्व सोच के संस्थापक संस्थापक एडवर्ड डी बोनो द्वारा लिखी किताब लेटरल थिंकिंग : एन इंट्रोडक्शन मदद कर सकती है। दोनों आपको रचनात्मक तरीके से सोचना और रास्ता निकालना सिखायेंगे, यहाँ तक ​​कि उन परिस्थितियों में भी जब कोई रास्ता नहीं दिखता है।

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