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बिहेवियरल मार्केटिंग

बिहेवियरल मार्केटिंग क्या होती है?

बिहेवियरल मार्केटिंग क्या होती है

बिहेवियरल मार्केटिंग— यह उपभोक्ता के व्यवहार और इंसान की साइकोलॉजी पर आधारित मार्केटिंग होती है, जो उनके द्वारा किए गए आर्थिक निर्णयों को प्रभावित करती है। 

 बहुत लम्बे समय से यह माना जाता था, कि खरीदार निर्णय लेते समय इकोनॉमिक प्रॉफिट के तहत काम करते हैं, अर्थात, वे केवल उन चीजों को ही खरीदते हैं जो उन्हें लागत को कम करने और लाभ को अधिकतम करने की अनुमति देती हैं। हालाँकि, 2000 के दशक की शुरुआत में, मनोवैज्ञानिकों ने पाया कि वास्तविक जीवन में लोग इस तरह से कार्य नहीं करते हैं और इस तरह से निर्णय नहीं लेते हैं, जैसा कि अर्थशास्त्र और इसके विशेषज्ञ इसकी कल्पना करते हैं। इंसान को न केवल तर्कहीन पाया गया, बल्कि यह भी अनुमान लगाया गया कि उनके खरीद निर्णयों पर भावनाओं का क्या प्रभाव होता है। उत्पादों को बढ़ावा देने और बेचने के लिए इन भावनाओं की समझ और उपयोग ने बिहेवियरल मार्केटिंग को जन्म दिया। सरल शब्दों में, बिहेवियरल मार्केटिंग (जैसा कि कई मार्केटिंग और साइकोलॉजी की किताबें भी इसे कहते हैं) तब होती है, जब आप इकोनॉमिक्स और साइकोलॉजी के सिद्धांतों को जोड़ते हैं, तथा अधिक प्रभावी बिक्री के लिए दोनों क्षेत्रों से ज्ञान का अनुकूलन करते हैं।

बिहेवियरल मार्केटिंग की परिभाषा

बिहेवियरल मार्केटिंग की परिभाषा

 बिहेवियरल मार्केटिंग की कोई सख्त वैज्ञानिक या प्रोफेशनल परिभाषा नहीं है। बिहेवियरल मार्केटिंग को अक्सर एक ग्राहक-उन्मुख रणनीति के रूप में समझा जाता है जिसका उद्देश्य है ग्राहकों के व्यवहार का अध्ययन करना ताकि प्रभावी विज्ञापन अभियान, ब्रांड या बिलकुल ही कोई अलग उत्पाद बनाया जा सके। 

 फायदे के संदर्भ में यदि हम परिभाषित करते हैं कि बिहेवियरल मार्केटिंग क्या है, तो यह उन कार्यों का एक समूह है जो निम्नलिखित कार्यो को करने की अनुमति देता है:

  • टार्गेट ऑडियंस के लिए विज्ञापन अभियान को अनुकूलित करना। ऐसा करने के लिए, Google जैसे तकनीकी दिग्गजों की मदद से एकत्र डेटा और ऑडियंस के सेगमेंट के लिए विज्ञापन के निजीकरण का उपयोग किया जाता है, यानी, उनकी आवश्यकताओं और हितों के आधार पर व्यापार प्रस्तावों का गठन किया जाता है। 
  • अधिक संभावित ग्राहकों को आकर्षित करना। बिहेवियरल मार्केटिंग के दौरान, डेटा का विश्लेषण किया जाता है, जो इस मार्केटिंग का आधार बनते हैं। ये डेटा नए ग्राहकों को आकर्षित करने,संसाधनों को कम करने और फाइनेंसियल इन्वेस्टमेंट को कम करने में भी सक्षम होते हैं। 
  • बिक्री को बढ़ाना। बिहेवियरल मार्केटिंग की सहायता से, लोग उन उत्पादों को देखते और प्राप्त करते हैं जिनकी उन्हें वास्तव में आवश्यकता होती है, इसलिए वे उन्हें खरीदने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं।
  • ऑडियंस के साथ संबंध मजबूत करना। बिहेवियरल मार्केटिंग — केवल विज्ञापन और बिक्री से संबंधित नहीं है, बल्कि यह संबंधों के निर्माण से भी संबंधित है। ऑडियंस देखते हैं कि उनके दर्द और प्राथमिकताएँ कंपनी के लिए महत्वपूर्ण हैं, और इस प्रकार से लोंगो के बीच ब्रांड के प्रति लॉयल्टी बढ़ती है। 

इसके अलावा, इस दृष्टिकोण की मदद से, आप बिहेवियरल ऑडिट (ट्रिगर्स, आदतों और कर्मचारियों की प्रेरणा का विश्लेषण) या पर्सनल मार्केटिंग (पर्सनल ब्रांड का प्रचार) कर सकते हैं। 

बिहेवियरल मार्केटिंग के प्रकार

बिहेवियरल मार्केटिंग के प्रकार

 व्यवहारिक तौर पर, आर्गेनाइजेशन में बिहेवियरल मार्केटिंग दो प्रकार के होते हैं:

  1. डेटा के आधार पर मार्केटिंग (Data-driven marketing) यह ग्राहक डेटा का विश्लेषण करने की गतिविधि है जो खरीदारी करते समय उनकी प्राथमिकताओं और उद्देश्यों के बारे में विचार प्रदान करती है। एकत्रित की गयी बिहेवियरल संबंधी विशेषताएँ व्यवसाय को अपने उपभोक्ताओं को ठीक उन्हीं उत्पादों की पेशकश करने में मदद करती हैं जो इन विशेषताओं के अनुरूप होंगे। इस प्रकार से, विशेषताओं के आधार पर, टार्गेटिंग, email- स्ट्रेटेजी, और डायरेक्ट बिक्री आदि का गठन किया जाता है।

  2. बिहेवियरल इकोनॉमिक्स (Behavioral economics) यह साइकोलॉजी और इकोनॉमिक्स का मिश्रण है, अर्थात, सोच, धारणा और निर्णय लेने के कुछ एल्गोरिदम के आधार पर उत्पादों की बिक्री और प्रचार करना। बिक्री बढ़ाने के लिए कंपनी अपने उत्पादों को इन एल्गोरिदम में शामिल करती है। 

बिहेवियरल मार्केटिंग के प्रकार, जटिलता और मांग के स्तर पर अलग अलग होते हैं। अतः, डेटा के आधार पर मार्केटिंग — एक व्यावहारिक दृष्टिकोण है, और बिहेवियरल इकोनॉमिक्स — एक सैद्धांतिक दृष्टिकोण है। यही कारण है कि बिहेवियरल इकोनॉमिक्स बिज़नेस में लागू करना अधिक कठिन होता है, क्योंकि इसके लिए कर्मचारियों की स्पेशल ट्रेनिंग, कंपनी के नवीनीकरण और उपभोक्ताओं के वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए "बिहेवियरल" लेबोरेटरी का निर्माण और परिकल्पनाओं का परीक्षण करने की आवश्यकता होती है। डेटा के आधार पर मार्केटिंग का उपयोग करना बहुत आसान है, यह आंकड़ों के आधार पर ग्राहक के व्यवहार पैटर्न को भी परिभाषित करता है, और साथ ही सेल्स चैनल, व्यावसायिक प्रक्रियाओं आदि का भी अनुकूलन करता है।

बिहेवियरल मार्केटिंग के उपकरण

बिहेवियरल मार्केटिंग के उपकरण

 बिहेवियरल मार्केटिंग चालीस साल पहले असंभव होता, जब कोई इंटरनेट नहीं था, और फलस्वरूप, ऑडियंस की व्यवहारिक विशेषताओं को इकट्ठा करने और विश्लेषण करने के लिए कोई उपकरण नहीं थे। आज, निम्नलिखित ऑनलाइन उपकरणों को बिहेवियरल मार्केटिंग के हिस्से के रूप में सक्रिय रूप से उपयोग किया जाता है:

  • Conversation Score — यह Facebook पेज का विश्लेषण करता है और और इसकी विशेषताओं, कवरेज इत्यादि पर डेटा प्रदर्शित करता है।
  • Hitalama — यह Instagram में प्रोफाइल एनालाइज़र है।
  • हिस्ट्री, क्वेरी, सर्च, यूज़र्स (इसका अर्थ यह है कि कीवर्ड एक पूरी तरह से विस्तृत समझ प्रदान करते हैं कि यूज़र्स के द्वारा किन ज़रूरतो की खोज की जा रही है और कैसे; 
  • यूज़र्स की सोशल लाइफ की जानकारी: 
  • पिछले आर्डर और खरीदारी का डेटा (उदाहरण के लिए, जिसके आधार पर नए ऑफ़र बनाए जा सकते हैं)
  • रजिस्ट्रेशन के दौरान यूज़र द्वारा दर्ज किया गया डेटा।

सोशल नेटवर्क पर, कई मुफ़्त सेवाएँ और एप्लिकेशन भी हैं, जो आपको डेटा तक पहुँचने की अनुमति देते हैं जैसे कि नंबर ऑफ़ लाइक्स, यूज़र्स के कमेंट्स आदि। इसके सहायता से, आप यूज़र्स के सामाजिक संबंध, उनकी गतिविधि का समय और दायरा, ट्रिगर्स, आदतों, मोटिवेशन, ओर्गनइजेशनल बिहेवियर इत्यादि निर्धारित कर सकते हैं। यह सब, बदले में, आपको यह चुनने की अनुमति देता है कि मार्केटिंग में कौन से बिहेवियरल इफेक्ट्स शामिल होंगे। 

 विशेष रूप से, निम्नलिखित उपकरणों का उपयोग बिहेवियरल मार्केटिंग को लागू करने के लिए किया जाता है:

  • email-मार्केटिंग;
  • रिटार्गेटिंग
  • टार्गेटिंग;
  • कंटेंट बनाना;
  • USP का गठन 
  • चैट बोट्स;
  • इंटरैक्टिव डिज़ाइन एलिमेंट्स।

 उपकरण चुनते समय, उन्हें लागू करने का पहलू महत्वपूर्ण है, लेकिन जो मुख्य फैक्टर है वह है — चयन किए गए ऑडियंस के सेगमेंट की विशेषताएँ।

बिहेवियरल मार्केटिंग को लागू करने के स्टेप्स

बिहेवियरल मार्केटिंग को लागू करने के स्टेप्स

बिहेवियरल मार्केटिंग बिज़नेस को विकसित करने, ऑडियंस के साथ जुड़ने और बिक्री करने में मदद करती है। इसे तीन स्टेप्स में लागू किया जाता है:

  1. डेटा का कलेक्शन और विश्लेषण। इस स्तर पर, बिज़नेस द्वारा उपयोग किए जाने वाले सभी कम्युनिकेशन चैनल आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के लिए जुड़े हुए होते हैं। ये जानकारी यह समझने की कुंजी बन जानी चाहिए कि ग्राहक के द्वारा उत्पाद चुनते समय वह कौन सी चीज़ है जो ग्राहक को कंट्रोल करती है, उसके आदतों को ध्यान में रखते हुए, कौन से ऑफ़र उसके लिए सबसे अधिक प्रासंगिक हैं, आदि। 
  2. ऑडियंस का विभाजन। जनसांख्यिकीय सहित प्राप्त आंकड़ों के आधार पर, ऑडियंस को उन समूहों में विभाजित किया जाता है जो समूह सामान्य संकेत (या संकेतो) को जोड़ते हैं।
  3. प्राप्त डेटा का उपयोग। प्रत्येक समूह की अपनी बिहेवियरल मार्केटिंग की रणनीति होती है जो उनमें से प्रत्येक के बारे में जानकारी के आधार पर होती है। 

बिहेवियरल मार्केटिंग के उदाहरण

बिहेवियरल मार्केटिंग के उदाहरण

मार्केटिंग में निम्नलिखित उदाहरण आपको अपने बिज़नेस के भीतर इस दृष्टिकोण की अपनी दृष्टि बनाने में मदद कर सकते हैं:

  • Amazon. उन ग्राहकों के डेटा को इकट्ठा करने के बाद, जो ग्राहक, उनके ऑर्डर के आंकड़ों के अनुसार, आमतौर पर त्योहारों से पहले आखिरी समय पर खरीदारी करते हैं, Amazon ने वेलेंटाइन डे के सम्मान में Facebook पर एक विज्ञापन लॉन्च किया, जिसमें उपहार ऑर्डर करने पर केवल एक दिन में डिलीवरी करने का ऑफ़र दिया गया था। 
  • Shein. एक ऑनलाइन स्टोर है जो नोटिफिकेशन की सहायता से उन यूज़र्स को दोबारा से वेबसाइट पर वापस आने और चेकआउट पूरा करने की पेशकश करता है, जिन्होंने कार्ट में उत्पाद को रखा है, लेकिन खरीदारी पूरी नहीं की है। 
  • Coca-Cola. कंपनी ने युवा लोगों के सेगमेंट के लिए एक अलग उत्पाद बनाया है जो फिगर की परवाह करते हैं। इसके अलावा, उन्होंने न केवल चीनी के बिना ड्रिंक के वर्ज़न को विकसित किया, बल्कि एक नए प्रकार का "पतली" कैन (पहले की तुलना में लम्बी और पतली) भी लॉन्च की।
  • Guiness. सिक्स नेशंस रग्बी कप के सम्मान में, गिनीज स्पिरिट्स कंपनी ने एक नया उत्पाद, Guinness Clear, और एक विज्ञापन, बिना बुरा महसूस किए "एक यादगार रात बनाएं" को लॉन्च किया, Guinness Clear साधारण पानी था जिसपर गिनीज ब्रांड का लेवल लगा हुआ था, जिसे मैच के दौरान शराब नहीं पीने वाले लोग पी सकते थे, और जिससे पीने वालों की उनके साथ संगति बनी रहे।

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