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रिटारगेटिंग (पुनर्लक्ष्यीकरण)

रिटारगेटिंग क्या है

रिटारगेटिंग — उन यूज़र्स के लिए किसी विज्ञापन के पुनः प्रदर्शन की तरह होती है जो पहले भी उस विज्ञापन को देख चुके होते हैं। टारगेटिंग (लक्ष्यीकरण) — किसी उत्पाद के विज्ञापन को, उन लोगों को दिखाने का एक तरीका है जो वास्तव में उसमें रुचि रखते हैं। रिटारगेटिंग उसके उपप्रकारों में से एक है। यह संभावित ग्राहक द्वारा याद रखे जाने और खरीदारी की संभावना बढ़ाने का एक तरीका है। हममें से ज़्यादातर लोगों के लिए, किसी खास उत्पाद को खरीदने का निर्णय लेने के लिए केवल एक बार उसका विज्ञापन देखना काफी नहीं होता है।

रिटारगेटिंग की मदद से, आप उन साइटों पर विज्ञापन प्रदर्शित कर सकते हैं जिनमें बैनर लगाने की सुविधा होती  हैं, जैसे कि Google Ads के ब्लॉक, मोबाइल एप्लिकेशन पर या सोशल नेटवर्क पर, साथ ही कंपनी की वेबसाइट पर भी। 91% से अधिक मार्केटर्स मानते हैं कि रिटारगेटिंग उतनी  ही प्रभावी होती है जितना कि सर्च एडवरटाइजमेंट, ईमेल मार्केटिंग और अन्य प्रचार साधन प्रभावी होते हैं।

रिटारगेटिंग की मदद से, आप न केवल इच्छुक दर्शकों के लिए विज्ञापनों के प्रदर्शन को आकार दे सकते हैं, बल्कि:

  • आप ग्राहक को उस उत्पाद के बारे में भी याद दिला सकते हैं जिसे उसने कार्ट में डाला था, लेकिन अभी तक खरीदा नहीं है;
  • आप उन उत्पादों की अनुशंसा कर सकते हैं जो ग्राहक को पसंद आ सकते हैं;
  • उन्हें नये उत्पादों के बारे में बता सकते हैं;
  • किसी विशिष्ट ब्रांड का विज्ञापन कर सकते हैं।

इन सभी चुनौतियों का समाधान करने के लिए, आपको उपयुक्त रिटारगेटिंग नीति लागू करने की ज़रूरत है।

रिटारगेटिंग के प्रकार

लोगों के साथ बातचीत करने के उद्देश्य और तरीकों के आधार पर, पांच प्रकार की रिटारगेटिंग होती है:

  • सर्च रिटारगेटिंग- इस तरह की रिटारगेटिंग में, यूज़र को उसके पूछताछ से संबंधित उत्पादों का विज्ञापन बैनर दिखता है जो वह सर्च करता है। इस प्रकार का विज्ञापन प्रदर्शन आमतौर पर Google Ads में कॉन्फ़िगर किया जाता है। विभिन्न सेवाओं में, सेकेंडरी ऐड डिस्प्ले को, रीमार्केटिंग और रिटारगेटिंग, कहा जाता है, लेकिन अलग-अलग नामों से ऐड अकाउंट खोलने के सिद्धांतों पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता।
  • साइट पर जाने के बाद रिटारगेटिंग- इस मामले में, उन लोगों के लिए रिटारगेटिंग की जाती है जो कंपनी की वेबसाइट पर जाते हैं। Cookies (कुकीज़) का उपयोग करके डाटा एकत्र किया जाता है जो कि यूज़र की गतिविधियों की निगरानी करती हैं और उनके द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली साइटों पर ऐड बैनर डिस्प्ले किया जाता है। लेकिन इस तरह से यूज़र का डेटा एकत्र करने से पहले, आपको उसकी सहमति लेनी ज़रूरी है।
  • सोशल रिटारगेटिंग, या सोशल मीडिया रिटारगेटिंग- इस तरह की टारगेटिंग को सोशल नेटवर्क पर यूज़र्स की गतिविधि के आधार पर, उनके लाइक और रीपोस्ट के आधार पर कॉन्फ़िगर किया जाता है। फेसबुक ऐड को सबसे प्रभावी सोशल मीडिया विज्ञापन माना जाता है।
  • डायनामिक रिटारगेटिंग-  डायनामिक रिटारगेटिंग — एक ऐसी तकनीक है जिससे आप संभावित ग्राहकों के लिए व्यक्तिगत विज्ञापन प्रदर्शित कर सकते हैं। उन्हें उन उत्पादों के विज्ञापन दिखाये जायेंगे जिनमें ग्राहक ने पहले से रुचि दिखाई है: किसी उत्पाद की साइट खोली या कार्ट में डाल दिया। आमतौर पर, ऐसे विज्ञापन बैनर बनाने के लिए उसी प्रोडक्ट कार्ड का उपयोग किया जाता है।

नियम के अनुसार, रिटारगेटिंग की लागत, जिस विशेषज्ञ ने उस विज्ञापन को बनाया है उसके काम के भुगतान को छोड़कर, दो संकेतकों में से किसी एक के आधार पर निर्धारित की जाती है: प्रदर्शन की संख्या या क्लिक की संख्या। पहले मामले में, कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि कितने लोगों ने विज्ञापन देखा, और दूसरे में - कितने लोगों ने विज्ञापन के लिंक पर क्लिक किया। रिटारगेटिंग  करना, पेमेंट मॉडल के चुनाव के साथ, इस बात पर निर्भर करता है कि विज्ञापन देने वाले ने अपने लिए किस तरह का लक्ष्य निर्धारित किया है। रिटारगेटिंग का पेमेंट मॉडल, जहां विज्ञापनदाता ऐड इंप्रेशन के लिए भुगतान करता है, केवल तभी फायदेमंद होता है जब मुख्य लक्ष्य उत्पादों की बिक्री के बजाय ब्रांड की जागरूकता बढ़ाना हो।

किसी भी प्रकार की रिटारगेटिंग के लिए, मुख्य चुनौती ऑडियंस यानी दर्शकों की होती है। किसी भी लक्ष्य की उपलब्धि इस बात पर निर्भर करेगी कि आपने सही रिटारगेटिंग ऑडियंस को चुना है या नहीं।

दर्शकों की रिटारगेटिंग

दर्शकों की रिटारगेटिंग करना - वे लोग जो पहले टारगेटिंग का हिस्सा रह चुके हैं ( जिन्होंने दुकान की वेबसाइट विज़िट की, अपना संपर्क आपको दिया, लिंक को फॉलो किया, आदि)। रिटारगेटिंग के लिए, साइट पर जाने के बाद, संपर्कों का संग्रह इस प्रकार किया जाता है: जब यूज़र उत्पाद के पेज पर जाता है, तो यह कार्यवाही एक काउंटर (पिक्सेल रिटारगेटिंग) सेट कर देती है। उसके बाद, यूज़र ने जिस उत्पाद में रुचि दिखाई थी उसका विज्ञापन उसे सभी पार्टनर वेबसाइटों और सोशल नेटवर्क में दिखना शुरू हो जाता है, ताकि उसे खरीदारी करने के लिए वापस लाया जा सके।

रिटारगेटिंग के लिए, आप विभिन्न स्रोतों से प्राप्त ग्राहक डेटा का उपयोग कर सकते हैं:

  • पिक्सेल रिटारगेटिंग- यह एक खास प्रोग्राम कोड है जिसे कंपनी अपनी वेबसाइट पर लागू करती है और उसे विज्ञापन कैबिनेट में कॉन्फ़िगर करती है। इस तरह के पिक्सेल को न केवल कंपनी की वेबसाइट पर स्थापित किया जा सकता है, बल्कि फेसबुक जैसे कुछ सोशल नेटवर्क पर कंपनी के पेजों पर भी स्थापित किया जा सकता है;
  • कंपनी का डेटाबेस- इस डेटाबेस में नियमित ग्राहकों की संपर्क जानकारी या डेटा हो सकता है जिसे कंपनी लीड मैगनेट का उपयोग करके एकत्र करती है: सोशल नेटवर्क पर पेज, ईमेल एड्रेस, यूनिक डिवाइस आईडेंटिफायर्स (MAC-एड्रेस ), फोन नंबर;
  • समान दिखने वाले दर्शक- कुछ साइटों पर, जैसे कि फेसबुक पर, आप अपने ग्राहकों के समान दिखने वाले दर्शकों का चयन कर सकते हैं। ऐसा करने के लिए, आपको मौजूदा डेटाबेस को अपलोड करना होगा, और यह सेवा समान लिंग, आयु और उसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को ढूंढ लेगी।

रिटारगेटिंग आपको नये ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद नहीं करेगी, लेकिन आपके पुराने दर्शकों को वापस लाने के लिए उसका प्रभावी ढंग से उपयोग किया जा सकता है। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए लक्षित है जो पहले ही किसी ऑनलाइन स्टोर का उत्पाद पेज देख चुके होते हैं, सोशल नेटवर्क पर कंपनी के पेज पर गये होते  हैं, या उसके विज्ञापन में रुचि रखते हैं। आखिरकार, जो यूज़र पहले ही किसी उत्पाद के बारे में जानकारी खोज चुके हैं, आमतौर पर वे खरीदारी करने के अधिक इच्छुक होते हैं और इंटरनेट पर विज्ञापन देखने वाले दूसरे लोगों की तुलना में उत्पाद को अधिक बार खरीदते हैं।

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