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ब्रांडिंग

ब्रांडिंग क्या होती है?

ब्रांडिंग क्या होती है

ब्रांडिंग  ब्रांड के प्रति ग्राहकों की वफादारी और जागरूकता को बढ़ाने के लिए कंपनी की सकारात्मक छवि के निर्माण और प्रचार करने को कहते हैं। ब्रांडिंग में एक साथ कई प्रक्रियाएं और अवधारणाएं शामिल होती हैं: कंपनी की छवि बनाने, मिशन और मूल्यों को विकसित करने से लेकर बाजार में कंपनी की स्थिति बनाने और ग्राहकों के साथ संचार चैनल चुनने तक। ब्रांडिंग अक्सर मन के अचेतन पहलू का भी उपयोग करता है, जो किसी व्यक्ति के जुड़ाव, आदतों और ट्रिगर्स को आकर्षित करता है।

सरल शब्दों में कहें तो, ब्रांडिंग — एक तरह का ब्रांड मैनेजमेंट होता है। वहीँ ब्रांड, कंपनी की कॉर्पोरेट पहचान और चिह्न होता है, इसके नाम और प्रतिष्ठा की पहचान होता है। इस तरह, ब्रांडिंग कंपनी को अपनी यूनिक स्टाइल बनाने का मौका देती है, जो बदले में, उत्पाद के मूल्य को बढ़ाती है और ग्राहकों के साथ दीर्घकालिक और भरोसेमंद संबंध बनाने में मदद करती है। आज, ब्रांडिंग के बिना बड़ी रिटेल लगभग असंभव है।

ब्रांडिंग की विशेषताएं

ब्रांडिंग में नीचे दिए गए टास्कों का समूह शामिल होता है:

  • कंपनी या उसके विशिष्ट उत्पादों के आसपास एक ज़रूरी आकर्षक छवि बनाती है।
  • बाजार में कंपनी की स्थिति और प्रतिष्ठा को मजबूत करती है।
  • माल की लागत पर तर्क देती है, एक अस्सोसिएटिव (जोड़ने वाला) अर्थ देती है और उपभोक्ताओं की नजर में उनका मूल्य बढ़ाती है।
  • कंपनी और ग्राहकों के बीच संचार स्थापित करती है।
  • मार्केटिंग चैनल और प्रचार रणनीति को चुनती और ऑप्टिमाइज़ करती है।
  • आपको प्रतिस्पर्धीयों के पास पहले से उपलब्ध फायदें को देखने और सक्षम रूप से उनके साथ प्रतिस्पर्धा कर उन्हें पछाड़ने की अनुमति देती है।
  • प्रतिस्पर्धियों से अलग करती है और ब्रांड की पहचान बनाती है।

इस प्रकार, ब्रांडिंग के सभी फंक्शन और टास्कों का एकमात्र उद्देश्य ब्रांड की मार्केट पोजीशन को मजबूत करना और नए उत्पादों के प्रचार या लॉन्च की प्रभावशीलता को बढ़ाना होता है।

ब्रांडिंग के चरण

ब्रांडिंग के चरण

ब्रांडिंग के विकास में निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

  1. बाजार का मार्केटिंग विश्लेषण। इसमें प्रतिस्पर्धियों का अध्ययन और टार्गेट ग्राहकों का अध्ययन, प्रमुख बाजार प्रवृत्तियों की पहचान, प्रतिस्पर्धी माहौल और संभावित ग्राहकों की प्रमुख जरूरतें शामिल होते हैं।
  2. ब्रांड की वर्तमान स्थिति का ऑडिट करें। यदि कंपनी पहले ही कुछ समय से बाजार में मौजूद है, तो उसकी प्रतिष्ठा, मान्यता, स्थिति आदि के बारे में सभी उपलब्ध जानकारी एकत्र करना आवश्यक है। इससे यह पहचानने में मदद मिलेगी कि आपके मामले में ब्रांडिंग के कौन से मूलादर्शों  का उपयोग किया जा सकता है।
  3. ब्रांड आईडिया और मूल्यों का निर्माण। भविष्य की छवि का कोर तैयार करना ज़रूरी है, कंपनी के मूल्यों और उत्पादों को परिभाषित करें, जिन्हे आपके ब्रांड को ग्राहकों तक पहुंचाने की जरूरत है। अपनी कंपनी की कॉर्पोरेट संस्कृति और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ दोनों पर भरोसा करना चाहिए होता है। उदाहरण के लिए, यदि आपके पास एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं जिसका उपयोग करना सहज है और जिसके पास नवीनतम और सबसे अच्छे कोर्स हैं, तो आपके प्लेटफॉर्म का मुख्य मूल्य, वास्तविक जीवन के लाभों के लिए अभ्यास पर जोर देना और सेल्फ-एजुकेशन के क्षेत्र में कार्रवाई करने की स्वतंत्रता होना हो सकता है।
  4. ब्रांड की पहचान बनाने वाले तत्वों का निर्माण। जब ब्रांड वैल्यू और ग्राहकों की जरूरतों का आईडिया तैयार होता है, तो आप एक को दूसरे के साथ जोड़ सकते हैं। ब्रांड की पहचान बनाने वाले तत्वों में शामिल होता हैं: कंपनी का नाम, स्लोगन, ब्रांड की कहानियां/इतिहास, प्रतीक, लोगो और फोंट जो एक एकीकृत कॉर्पोरेट पहचान बनाएंगे और ब्रांड का चरित्र-चित्रण करेंगे।
  5. ब्रांड बुक और दिशानिर्देश तैयार करना। अपने ब्रांड की एक सुसंगत तस्वीर बनाने के लिए, आपको पिछले चरणों में बताए गए विज़ुअल और मौखिक ब्रांडिंग तत्वों को संयोजित करने की आवश्यकता है। इसके लिए, एक ब्रांड बुक विकसित की जाती है (कंपनी की संस्कृति, मूल्यों और शैली को प्रस्तुत करने की एक आधिकारिक गाइड) और एक दिशानिर्देश (ब्रांड शैली का उपयोग करने के लिए दिशानिर्देश) तैयार किये जाते हैं। उनमें ब्रांड की सभी विशेषताओं, उनके उपयोग और संयोजन के विकल्पों को व्यवस्थित किया जाता है, और ग्राहकों के साथ संचार के तरीके और चैनल भी निर्धारित किए जाते हैं।
  6. असेंबल की गई ब्रांड बुक और दिशानिर्देश के आधार पर दीर्घकालिक प्रचार रणनीति बनाना। यह सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण होता है, जिसमें इसके पैमाने, विशिष्ट संभावनाओं और कंपनी के लक्ष्यों के आधार पर एक, तीन या पांच साल आगे के लिए किसी ब्रांड के डेवलपमेंट का निर्माण करना शामिल होता है।
  7. विश्लेषण और कार्यान्वयन। वास्तविक ब्रांडिंग के कार्यान्वयन के लिए आगे बढ़ने से पहले, एक बार फिर से प्रोजेक्ट के विवरण की समीक्षा और विश्लेषण करना, उन्हें बाजार की वास्तविक स्थिति के साथ सहसंबंधित करना और परिकल्पनाओं का परीक्षण करना आवश्यक होता है। फिर आप कार्यान्वयन करना शुरू कर सकते हैं।

एक ब्रांडिंग एजेंसी इन सभी चरणों को अपने आप पूरा कर सकती है और आपको टर्नकी ब्रांडिंग का ऑर्डर देने की पेशकश कर सकती है। ब्रांडिंग की लागत और संबंधित सेवाओं की कीमत आपके व्यवसाय के पैमाने, उसके लक्ष्यों और विशेषताओं के आधार पर तय होती है।

ब्रांडिंग के उपकरण 

ब्रांडिंग के उपकरण 

ब्रांड बनाते समय, निम्नलिखित उपकरणों का उपयोग किया जाता है:

  1. ब्रांड का आर्किटेक्चर बनाना। इसमें ब्रांड की संरचना, ब्रांड की पोर्टफोलियो, भूमिकाएं और ब्रांड के ग्राफिक्स शामिल होते हैं।
  1. उन गुणों के समूह के आधार पर ब्रांड के आईडेंटिटी एलिमेंट्स (लोगो, स्लोगन, शैली, आदि) का निर्माण करना, जिनके साथ आगे चलकर ब्रांड को ग्राहकों के साथ जोड़ा जाना चाहिए।
  1. संचार कार्यक्रमों का निर्माण। इसमें विज्ञापन बनाना, पोस्टर बनाना, प्रोमो वीडियो शूट करना, प्रायोजित कार्यक्रम, डिस्काउंट सेल और साइट का टॉप सर्च में दिखने का ऑप्टिमाइजेशन करना शामिल होता है।

ब्रांडिंग रणनीतियाँ

चार मुख्य रणनीतियाँ हैं जो एक यूनिक कंपनी ब्रांड बनाने में मदद कर सकती हैं जो लोकप्रिय हो सके:

  • को-ब्रांड। यह बिक्री, लाभ और उपभोक्ता मांग में वृद्धि जैसे सामान्य लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कई ब्रांडों को किसी प्रोग्राम में संयोजित करने की रणनीति होती है। उदाहरण के लिए, बैंक और उसके पार्टनर्स के प्रोग्राम, जो साथ मिलकर अधिक फायदेमंद परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। तब सवाल उठ सकता है: फिर को-ब्रांडिंग क्या होती है? उत्तर: दोनों एक ही चीज़ हैं।
  • मल्टी-ब्रांड। का अर्थ है एक समान लक्ष्य और पहचान के साथ एक ही प्रोडक्ट लाइन के अंदर एक साथ कई ब्रांडों का विकास करना। साथ ही, प्रत्येक प्रोडक्ट का प्रचार व्यक्तिगत रूप से किया जाता है, पर वह अलग उत्पाद अभी भी कंपनी के मुख्य ब्रांड के साथ अपना जुड़ाव नहीं खोता है।
  • मोनो-ब्रांड। जोखिम और संसाधन लागत को कम करने के लिए उत्पाद एक ही ब्रांड के नीचे जारी किए जाते हैं, लेकिन साथ ही साथ ब्रांड और सामान दोनों को उच्च गुणवत्ता प्रदान करते हुए, अधिकतम दक्षता हासिल करते हैं।
  • सब -ब्रांड। उनमें से एक ब्रांड हमेशा मुख्य होता है, जबकि बाकी अतिरिक्त ब्रांड के रूप में काम करते हैं और ग्राहकों को आकर्षित करने में मदद करते हैं। ब्रांडिंग की यह रणनीति को-ब्रांड के समान ही है, केवल अतिरिक्त कंपनियों के बीच संबंधों के स्वरुप में यह को-ब्रांड से भिन्न होता है (को-ब्रांड में वे पार्टनर होते हैं, और सब-ब्रांड में वे अधीनस्थ होते हैं)।

ब्रांडिंग के प्रकार

ब्रांडिंग के प्रकार

 निम्नलिखित प्रकार की ब्रांडिंग होती है:

कॉर्पोरेट ब्रांडिंग

कंपनी की ब्रांडिंग या कॉर्पोरेट ब्रांडिंग — ग्राहकों, भागीदारों और अपने कर्मचारियों के विश्वास को बढ़ाने के लिए कंपनी की छवि के निर्माण करने को कहते है। इस प्रकार की ब्रांडिंग का आधार — कंपनी के भीतर संस्कृति, विचारधारा, मूल्यों, मिशन और ब्रांड का विकास करना है। इसके अलावा, इस प्रकार की ब्रांडिंग न केवल टार्गेट ग्राहकों को, बल्कि खुद कर्मचारियों को भी प्रभावित करती है: उन्हें लगता है कि वे कंपनी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो व्यावसायिक प्रक्रियाओं को फायदा और मूल्य प्रदान करते हैं। HR डिपार्टमेंट भी कॉर्पोरेट ब्रांडिंग का अनुसरण करता है, जो उन विशेषज्ञों को आकर्षित करता है जो इस ब्रांडिंग से मेल खाते हैं, जो विशेष रूप से कंपनी के लिए अनुभवी और दिलचस्प होते हैं।

कॉर्पोरेट ब्रांडिंग किसी विशेष ट्रेडमार्क या नाम तक ही सीमित नहीं है, और इसमें न केवल पारंपरिक तत्व जैसे लोगो और छवि, बल्कि विशिष्ट आंतरिक नीतियां भी शामिल हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, कर्मचारियों की मुफ्त ट्रेनिंग या उनका उपचार, ऑफिस में गैर-मानक शर्तें, आदि कॉर्पोरेट ब्रांड का हिस्सा हो सकते हैं। कोई भी ऐसा संसाधन जो कंपनी की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है और लोगों को कंपनी के साथ बातचीत करने की अनुमति देता है, वह भी उसके ब्रांड को आकार देता है और कंपनी की धारणा को प्रभावित करता है।

प्रोडक्ट ब्रांडिंग

प्रोडक्ट ब्रांडिंग — कोई विशिष्ट उत्पाद, सेवा या प्रोडक्ट लाइन के लिए एक पहचानने योग्य छवि का निर्माण करना होता है। इसमें अधिकांश कॉर्पोरेट ब्रांडिंग के तत्व शामिल होते हैं, जैसे कि स्लोगन, डिज़ाइन, रंग आदि। किसी उत्पाद की ब्रांडिंग का उद्देश्य — उत्पाद के व्यक्तित्व को व्यक्त करना, बाजार में इसके मूल्य और लोकप्रियता को बढ़ाना, विशेषताओं को दिखाना और संभावित खरीदार को लाक्षणिक रूप से इसके फायदे प्रदर्शित करना होता है।

पर्सनल ब्रांडिंग

पर्सनल ब्रांडिंग, या व्यक्तिगत ब्रांडिंग — किसी कंपनी के बजाय किसी विशिष्ट व्यक्ति का प्रचार करना होता है, जो आमतौर पर, कोई प्रसिद्ध मीडिया पर्सनालिटी या कोई प्रोफेशनल व्यक्ति होता है जो अपने ज्ञान और अनुभव का मुद्रीकरण करना चाहता है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स और एक्सपर्ट ब्लॉगर्स के दौर में इस प्रकार की ब्रांडिंग विशेष रूप से प्रासंगिक हो गई है।

पर्सनल ब्रांडिंग के मामले में, एक व्यक्ति की, उसके कौशल, व्यक्तिगत गुणों, शैली और प्रसारित विचारों को ध्यान में रखते हुए, टार्गेट ऑडियंस के लिए एक पहचानने योग्य और आकर्षक छवि बनाई जाती है। पर्सनल ब्रांडिंग का पहला और मुख्य लक्ष्य किसी व्यक्ति को एक छोटे प्रोफेशनल दायरे में लोकप्रिय बनाना, उसके चारों ओर खुद का समुदाय बनाना होता है, और उसके बाद उसे धीरे-धीरे दूसरे और बड़े क्षेत्रों में पहुँचाना होता है। यहां सबसे महत्वपूर्ण चीज़ होती है — एक मजबूत और सकारात्मक प्रतिष्ठा विकसित करना। उच्च गुणवत्ता वाली सेल्फ-ब्रांडिंग का एक ज्वलंत उदाहरण — स्टीव जॉब्स या मार्क जुकरबर्ग हैं।

रीजनल ब्रांडिंग

रीजनल ब्रांड, या प्रादेशिक ब्रांडिंग — कोई देश, प्रदेश या किसी निश्चित क्षेत्र का एक ब्रांड होता है, जिसके प्रचार में वहां की सांस्कृतिक, राजनीतिक, आर्थिक या भौगोलिक विशेषताओं पर जोर दिया जाता है। सरल शब्दों में, यह जनता (स्थानीय और वैश्विक, दोनों) की नज़र में किसी विशेष स्थान की छवि या इमेज का निर्माण करना होता है। उदाहरण के लिए, किसी शहर की ब्रांडिंग में उस शहर की लोकप्रियता को बढ़ाना शामिल होता है। रीजनल ब्रांडिंग विशेष रूप से इन चीज़ों में मदद करती है:

  • उस क्षेत्र में निवेश आकर्षित करना, जो वहां के आर्थिक विकास में योगदान देता है (उदाहरण के लिए, पर्यटकों, उद्योग और अन्य चीज़ों के लिए स्पांसरों को आकर्षित करके);
  • भूगोलीय राजनीति में उस क्षेत्र के प्रभाव में वृद्धि;
  • अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और अन्य भौगोलिक संस्थाओं के साथ साझेदारी स्थापित करना।

नेशनल ब्रांडिंग

नेशनल ब्रांडिंग और रीजनल ब्रांडिंग में बहुत सी समानताएं होती हैं। नेशनल ब्रांडिंग का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर मार्केटिंग रणनीतियों और अवधारणाओं के उपयोग के माध्यम से देश की प्रतिष्ठा को मापना, बनाना और प्रबंधित करना होता है। आमतौर पर, यह वैश्विक प्रतिष्ठा को मजबूत करने, अंतर्राष्ट्रीय संबंध स्थापित करने और अन्य देशों के साथ संयुक्त परियोजनाओं को शुरू करने के लिए किया जाता है।

लेकिन, रीजनल ब्रांडिंग के विपरीत, नेशनल ब्रांडिंग केवल भूगोल तक ही सीमित नहीं है। उदाहरण के लिए, इसमें स्वयं राष्ट्र, उसकी संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देना या निर्यात बढ़ाने के लिए विशिष्ट राष्ट्रीय उत्पादों और प्रौद्योगिकियों को हाईलाइट करना शामिल हो सकता है।

राजनीतिक ब्रांडिंग

राजनीतिक ब्रांडिंग — वास्तव में उम्मीदवारों के लिए प्रचार करना होता है। इसमें नारे, सिंबल, पोस्टर और प्रचार वीडियो बनाने के साथ-साथ पार्टी का गठन और प्रचार भी शामिल होता है। राजनीतिक ब्रांडिंग आपको उम्मीदवार के मूल्यों, लक्ष्यों और विचारों को जनता तक जल्दी और सही ढंग से पहुंचाने का मौका देती है। साथ ही, इसकी अनूठी विशेषता है — अभियानों की छोटी अवधि, क्योंकि चुनाव हमेशा एक खास समय सीमा में होते हैं। इसलिए राजनीतिक ब्रांडिंग न केवल तेजी से होनी चाहिए, बल्कि तीव्र भी होनी चाहिए। इतिहास के सभी राजनीतिक अभियान इसके उदाहरण हैं, जैसे कि डोनाल्ड ट्रम्प या जो बाइडेन का चुनाव अभियान।

को-ब्रांडिंग

को-ब्रांडिंग — दो या दो से अधिक ब्रांडों के बीच सहयोग का एक रूप होता है, एक सहयोगी परियोजना जिसमें सभी ब्रांड अपनी पहचान बनाए रखते हैं, लेकिन कुछ नया और अपने सामान्य उत्पाद से परे कुछ बनाते हैं। इसकी बदौलत, उन्हें नए ग्राहकों और उनके लाभों तक एकीकृत पहुंच हासिल होती है, जिससे उनकी जागरूकता बढ़ती है। आमतौर पर, ऐसा सहयोग अल्पकालिक भी होता है और कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक चलता है। लंबे समय तक को-ब्रांडिंग से कंपनियों की पहचान धुंधली हो सकती है और उनकी "स्प्लाइसिंग", ब्रांडिंग को अप्रभावी बना सकती है। जैसे कि, को-ब्रांडिंग का एक उदाहरण है, Coca-Cola और OPI प्रोजेक्ट, जिसमें Coca-Cola ने अपनी चमकदार नेल पॉलिश की प्रोडक्ट लाइन पेश की थी।

ब्रांडिंग के उदाहरण

ब्रांडिंग के उदाहरण

मार्केटिंग में ब्रांडिंग के कुछ और उदाहरण यहां दिए गए हैं:

  1. Elo Soap (एलो सोप)। एक जानी-मानी कंपनी जो ग्रीक साबुन का उत्पादन करती है, जिसको बनाने में जैतून के तेल का इस्तेमाल शामिल होता है। कॉर्पोरेट ब्रांडिंग विशेषज्ञ माइक कोरोलोस ने एक मूल डिजाइन का कॉन्सेप्ट सोचा, जिसमें उपयुक्त रंगों और पैटर्न के उपयोग से विज़ुअली साबुन के ग्रीक मूल पर जोर दिया गया, पर इसने Elo (एलो) को ग्रीक देवताओं के अपने आधुनिक-शैली के चित्रण के कारण प्रतिस्पर्धा में एक अलग ही मुकाम पर खड़ा कर दिया।
  2. Pandora (पैंडोरा)। ज्वेलरी ब्रांड ने अपने गहनों की विशिष्टता पर जोर दिया, इस तथ्य के बावजूद कि सभी चार्म्स भारी मात्रा में उत्पादित होते हैं। प्रत्येक ब्रेसलेट को स्वतंत्र रूप से बनाने के विचार ने उन्हें "एक यूनिक उपहार जो आपकी यादों को सुरक्षित रखेगा" के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त करने में मदद की। ग्राहक अपने ब्रेसलेट यानि बेस ज्वेलरी को बदले बिना अलग-अलग तरह के चार्म्स उसमें जोड़ सकते हैं और इस प्रकार वास्तव में एक यूनिक डिजाइनर पीस बना सकते हैं। फैशन उद्योग में ब्रांडिंग का यह बढ़िया इस्तेमाल है।
  3. Lego (लेगो)। इंटरलॉकिंग खिलौने बनाने वाली इस कंपनी ने अपने मूल्यों के अनुसार बाजार पर कब्जा कर लिया है — जिसके मूल्य हैं, बच्चों को प्रेरित करना, उन्हें सहयोग करना और रचनात्मक रूप से समस्याओं को हल करना सिखाना। विशेष इंटरलॉकिंग खिलौनों के सेट की बदौलत इन मूल्यों को साकार करना संभव हो पाया है, जो आपको विशिष्ट दृश्यों को बनाने और उनके साथ खेलने की अनुमति देते हैं (उदाहरण के लिए, किसी घर में लगी आग को बुझाना, मरम्मत करना, आदि)। Lego के लिए एक और शक्तिशाली ब्रांडिंग टूल था अपना खुद का कंटेंट तैयार करना — फिल्में, गेम और YouTube के लिए सबसे लोकप्रिय वीडियो बनाना।

ब्रांडिंग पर लिखीं गई किताबें

यदि आप ब्रांडिंग सीखना चाहते हैं, बिलकुल नए सिरे से या मौजूदा ज्ञान को अपडेट करना चाहते हैं, तो निम्नलिखित पुस्तकों से शुरुआत करें:

  • टॉम पीटर्स द्वारा लिखी "Turn yourself into a brand (टर्न योरसेल्फ इन टू अ ब्रांड)"

टॉम पीटर्स एक अंतरराष्ट्रीय परामर्श कंपनी Tom Peters Company के प्रमुख हैं और उन्होंने इस किताब में अपने काम की दक्षता में सुधार करने के सभी तरीकों और मॉडलों को एकत्र किया है, जो उन्होंने अपने जीवनकाल में खुद के अनुभव से विकसित किए हैं। किताब में एक सफल व्यक्तिगत ब्रांड बनाने, अपने ज्ञान का मुद्रीकरण करने और वैश्विक रोबोटीकरण के युग में श्रम बाजार में प्रासंगिक बने रहने के बारे में 50 से अधिक सिफारिशें दी गई हैं।

  • ब्रायन ट्रेसी द्वारा लिखी "The Power of Branding (दि पावर ऑफ़ ब्रांडिंग)"

यह किताब कॉर्पोरेट और पर्सनल ब्रांडिंग बनाने के बुनियादी नियमों और दृष्टिकोणों का एक संग्रह है। यह सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत ब्रांड बनाने और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित करने के बारे में चरण-दर-चरण निर्देश भी प्रदान करता है। इस किताब की मदद से, आप एक आकर्षक बिक्री प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं और समझ सकते हैं कि अपने आपको प्रतिस्पर्धियों से कैसे अलग बनाना है।

  • मिशेल मांडाग द्वारा लिखी "The only book you will ever need on Branding (दि ओनली बुक यू विल एवर नीड ऑन ब्रांडिंग)"

किताब में शुरुआत से ही ब्रांड बनाने और प्रचार करने की प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया गया है, इसलिए यह किताब नए लोगों के लिए एकदम सही है। इसके साथ, आप प्रतिस्पर्धियों की पहचान करना और उनका विश्लेषण करना सीख सकते हैं, अपनी जागरूकता बढ़ा सकते हैं और सफल अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से सीख सकते हैं। किताब में दिए गए चमकदार चित्र भी कंटेंट को बेहतर ढंग से समझने में मदद करते हैं।

  • इदरीस मूटी द्वारा लिखी "60-minute Brand Strategist (60- मिनट ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट)"

इदरीस मूटी एक विश्व प्रसिद्ध मार्केटर हैं, जो कई बड़े निगमों के साथ मिलकर काम करते हैं। इस किताब में, लेखक ने दुनिया भर से एकत्र किए गए सर्वोत्तम रचनात्मक समाधान साझा किए हैं। इस पतली सी किताब का लाभ यह है कि — इसे पूरा पढ़ने में आपको ज़्यादा से ज़्यादा एक घंटा लगेगा। लेकिन ये किताब वास्तविक अनुप्रयोगों से भरी हुई है जिसे आप आज और अभी कंपनी के ब्रांड पर लागू कर सकते हैं।

फंडरेजिंग (धन एकत्र करना)

बजटिंग