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MVP (Minimum Viable Product)

MVP क्या है?

MVP क्या है

MVP न्यूनतम सुविधाओं के सेट के साथ प्रोडक्ट का शुरुआती वर्जन है जो लक्षित ग्राहकों की ओर शुरुआती प्रेजेंटेशन और उनके द्वारा परीक्षण के लिए पर्याप्त होता है। हालाँकि, "शुरुआती" विशेषता के बावजूद, यह प्रोडक्ट ग्राहकों के लिए उसकी असली कीमत जितना होना चाहिए। MVP का मतलब है Minimum Viable Product जिसको "न्यूनतम व्यावहारिक प्रोडक्ट" के रूप में ट्रांसलेट किया जाता है।

MVP की अवधारणा का प्रस्ताव कंसल्टिंग फर्म SyncDev के प्रेज़िडेंट फ्रैंक रॉबिन्सन ने रखा था। MVP की परिभाषा में प्रोडक्ट के विकास और ग्राहक अनुसंधान दोनों शामिल हैं। इस शोध के दौरान प्रोडक्ट की कार्यक्षमता को समायोजित, परिवर्तित और उसे पूरक किया जाता है। यही कारण है कि MVP का विकास अक्सर चक्रीय होता है, अर्थात, "एक संस्करण का निर्माण और फिर उसकी प्रस्तुति" के चरणों को तब तक दोहराया जाता है जब तक कि अंतिम वर्जन नहीं तेयार हो जाता जिसे अंतिम रूप देने की ज़रूरत नहीं होती है। इस प्रकार, MVP का मेन टास्क और MVP का मतलब प्रोडक्ट को और भी बेहतर बनाना और उसकी माँग को बढ़ाना है।

MVP के फ़ायदे

प्रोडक्ट का MVP बनाना बिजनेस के लिए ज़रूरी है, विशेष रूप से किसी भी स्टार्टअप के लिए, क्योंकि इससे आपको यह सब करने में मदद मिलती है:

  • लक्षित ग्राहकों से फीडबैक लेने में और इसके आधार पर प्रोडक्ट को मरकिट में लाने से पहले उसमें सुधार करने में;
  • ग्राहकों का तेज़ी से विस्तार करने और उन्हें आकर्षित करने में;
  • MVP बेचकर प्रोडक्शन पूरा होने से पहले ही फ़ायदा कमाने में;
  • प्रोजेक्ट के वित्तपोषण के लिए निवेशकों को प्रोत्साहित करने में;
  • विकास के साथ विश्लेषण को जोड़कर मर्किट और लक्षित ग्राहकों का विश्लेषण कर पैसा बचाने में।

MVP के नुकसान

MVP के नुकसान इस प्रकार हैं:

  1. शुरुआत में, MVP की कल्पना सॉफ्टवेयर बनाने के तरीके के रूप में की गई थी, इसलिए यह कार्यनीति, केवल अमूर्त प्रोडक्ट को तेयार करने के लिए ही सबसे उपयुक्त होती है। हालाँकि, आज इसका उपयोग Tesla ऑटोमोबाइल जैसे अन्य उद्योग भी कर रहे हैं।
  2. इनोवेशन के साथ असामंजस्य। नए उद्योग के लिए किसी उत्कृष्ट समाधान का MVP बनाना असंभव होना, क्योंकि लक्षित ग्राहकों का पूर्ण अध्ययन करना असंभव होता है (उदाहरण के लिए, यह केवल एक सुपरप्रोडक्ट के लिए तैयार नहीं हो सकता है और इसके बारे में सटीक डेटा भी प्रदान नहीं कर सकता है) 

बिजनेस में MVP क्या है? 

बिजनेस में MVP क्या है

MVP प्रोजेक्ट का निर्माण एक स्टार्टअप के लिए ज़रूरी होता है, क्योंकि एक बिज़नेस-आइडिया बनाने के दोरान ही एक उद्यमी के पास बनने वाले उत्पाद के कार्यों के बारे में पहली परिकल्पनाएँ होती हैं, जो या तो गलत और विश्वसनीय दोनों ही हो सकती हैं। इन परिकल्पनाओं का परीक्षण MVP के संदर्भ में उसमें सुविधाओं को जोड़कर और कुछ सीए अनुरोधों को विभिन्न तरीकों से संतुष्ट करने का प्रयास करके किया जाता है। इस प्रकार, बिज़नेस में MVP, कंपनी को प्रोडक्ट की माँग, चुने हुए बिज़नेस मॉडल की व्यवहार्यता की जाँच करने और मर्किट में प्रवेश करते समय जोखिम को कम करने में सहायता करता है। यह बिज़नेस को ऊपर वर्णित किए गए MVP के सभी फ़ायदों की गारंटी देता है, जिसमें Lean-स्टार्टअप भी शामिल है।

मार्केटिंग में MVP

MVP की मदद से आप न केवल प्रोडक्ट, बल्कि मार्केटिंग कार्यनीति का भी परीक्षण कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, एक न्यूज़लेटर जो उसके द्वारा लाए जाने वाले इंटरैक्शन और लीड्स की संख्या का मूल्याँकन करता है। MVP आपको कन्वर्जन, रिटर्न, प्रति लीड की लागत, औसत जाँच, प्रोजेक्ट की लागत और यहाँ तक कि डिज़ाइन का मूल्याँकन करने में भी मदद करता है। यदि हम इस बारे में बात करें कि MVP मार्केटिंग कैसे की जानी चाहिए (और एक पूर्ण प्रस्तुति करना और फ़ीडबैक इकट्ठा करना ज़रूरी है), तो इसके कई नियम हैं:

  • MVP लेवल पर मार्केटिंग का मुख्य लक्ष्य भविष्य में तैयार प्रोडक्ट को खरीदने के लिए वास्तविक ग्राहकों को खोजना नहीं है, बल्कि भुगतान करने वाले ऐसे ग्राहकों को खोजना है जो उसके विकास में भाग लेने के लिए तैयार हों।
  • MVP का प्रमोशन डिजिटल चैनलों पर निर्भर करता है, इसलिए आपको उसकी विषय-वस्तु, SEO, लक्ष्यीकरण और अन्य प्रकार के ऑनलाइन विज्ञापनों पर विशेष ध्यान देने की ज़रूरत होती है।
  • MVP के दौरान संबंधों को साझेदारी के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, अर्थात, पहले ग्राहकों को भागीदारों की तरह समझना और उनके प्रस्तावों पर ध्यान देना ज़रूरी है।
  • किसी भी अन्य मार्केटिंग की तरह ही MVP प्रमोशन की प्रभावशीलता को ट्रैक करना ज़रूरी है। फिर, परिणामस्वरूप, आपके पास न केवल एक तैयार प्रोडक्ट होगा, बल्कि एक तैयार मार्केटिंग कार्यनीति भी होगी।

MVP का डेवलपमेंट: प्रोडक्ट के प्रकार और विविधताएँ 

MVP का डेवलपमेंट

इससे पहले कि आप एक MVP को ड़ेवेलोप करना शुरू करें, आपको यह तय करना होगा कि आपको किस प्रकार के न्यूनतम व्यावहारिक प्रोडक्ट की ज़रूरत होती है:

  1. “कन्सीर्ज" - प्रोडक्ट का केवल एक "ऊपरी ढाँचा” तैयार किया जाता है। जिससे ग्राहक इसकी विशेषताओं का टेस्ट कर सकें, डेवलपर्स उन्हें मैन्युअल रूप से चलाते हैं और सारे इंटरैक्शन को नियंत्रित करते हैं। प्रोग्रामिंग में इस प्रकार का MVP सबसे अधिक प्रासंगिक होता है।
  2. “द विज़र्ड ऑफ़ ओज़” “कन्सीर्ज" का एक अधिक उन्नत मॉडल है, जहाँ इंटरैक्शन को बाहर से भी नियंत्रित किया जाता है, लेकिन प्रोडक्ट एक वास्तविक समाधान की तरह दिखता और महसूस होता है।
  3. "फ्रैगमेंटरी" - प्रोडक्ट का एक हिस्सा मैन्युअल रूप से नियंत्रित किया जाता है, और एक हिस्से को ऐल्गरिदम का उपयोग करके अनुरूपित किया जाता है।
  4. "दर्द की गोली" - ग्राहक की एक विशिष्ट समस्या को हल करने पर केंद्रित प्रोडक्ट होता है। भविष्य में, उत्पाद विकसित होता है और अधिक जटिल रूप में विकसित होता है।

MVP का निर्माण कैसे करें

MVP को तेयार करने का सबसे सुविधाजनक और सुरक्षित तरीका Agile का उपयोग करना है, लेकिन अन्य प्रबंधन कार्यनीतिओ का भी उपयोग किया जा सकता है। बिजनेस भले ही किसी भी प्रकार का हो, इसका निर्माण कई चरणों में होता है:

  1. हल करने के लिए पहले समस्या को पहचानें। इसका मतलब है कि आपको इस सवाल का जबाव देने की ज़रूरत है: अभी आपका प्रोडक्ट किस चीज़ के लिए ज़रूरी है? उन विशेषताओं पर तुरंत विचार करना आवश्यक है जो ग्राहकों को विकास के स्तर पर इसके मूल्य का एहसास कराने में मदद करेंगी।
  2. लक्षित ग्राहकों को परिभाषित करें और जितना हो सके इसे छोटा करें। MVP के इस चरण में ग्राहकों के प्रकार और उनकी जनसांख्यिकी (लिंग, आयु, इनकम का लेवल, आदि) का निर्धारण करना शामिल है।
  3. प्रतिस्पर्धी प्रोडक्ट का विश्लेषण करें। मार्किट के तीन प्रमुख खिलाड़ियों का चयन करें। उनके समकक्षों की कमज़ोरियों और ताकतों के फ़ायदों का पता लगाएँ? इसके आधार पर, आप कई परिकल्पनाओं को सामने रख सकते हैं या खुद के MVP की कार्यक्षमता निर्धारित कर सकते हैं।
  4. SWOT विश्लेषण करें - यह आगे के निर्णय लेने के लिए एक रणनीतिक योजना पद्धति है। इसके साथ, आप MVP के अवसरों और जोखिमों को विस्तृत रूप से समझ सकते हैं।
  5. एक यूज़र फ़्लो मैप बनाएँ, यानि वह रास्ता जिस पर उत्पाद के साथ इंटरैक्ट करते समय एक ग्राहक चलता है। इस तरह आप समझ सकते हैं कि ग्राहक के लिए कहाँ और कौन से प्रकार्य सबसे महत्वपूर्ण हैं, एक डिज़ाइन विकसित करना, एल्गोरिदम का अनुक्रम इत्यादि।
  6. आवश्यक प्रकार्यों की एक लिस्ट  तैयार करें और उन्हें प्राथमिकता दें। उसमें भविष्य के उत्पाद के लिए सबसे आवश्यक विशेषताएँ पहले आनी चाहिए (निश्चित रूप से उपयोगकर्ताओं के दृष्टिकोण से)।
  7. MVP का वह प्रकार चुनें जो आपकी आवश्यकताओं के लिए सबसे उपयुक्त हो।
  8. अपने MVP का A/B टेस्टिंग करें। अल्फा टेस्टिंग एक ऐसी टेस्टिंग है जिसमें प्रोडक्ट का मूल्याँकन उसका करीबी वातावरण करता है, उदाहरण के लिए, खुद डेवलपर्स और उनके परिचित लोग। दूसरी ओर, बीटा परीक्षण में वास्तविक उपयोगकर्ताओं द्वारा उत्पाद का मूल्याँकन शामिल होता है जो उत्पाद को कुछ समय के लिए आज़मा सकते हैं और आपको फीडबैक दे सकते हैं। इस टेस्टिंग के नतीजों के आधार पर, प्रोडक्ट में ज़रूरी सुधार लाए जाते हैं, संदर्भ की शर्तों को समायोजित किया जाता है, और कोई भी अनुपयोगी प्रकार्य हटाया जा सकता है। निर्माण के तरीकें या काम के प्रारूप भी डिज़ाइन के ढाँचे के भीतर बदल सकते है। इसलिए A/B टेस्टिंग के चक्र तब तक दोहराए जाते हैं जब तक कि प्रोडक्ट पूरी तरह से तैयार न हो जाए।

MVP पर कोई भी किताब या कोर्स आपको वास्तव में इन सभी चरणों में शीघ्रता से महारत हासिल करने में मदद करेगा।

MVP चेकलिस्ट

MVP चेकलिस्ट

नतीजों की विश्वसनीयता और वैधता सुनिश्चित करने के लिए, इसके विकास के दौरान या उसके पूरे होने के बाद, अपने आप को और एक नए प्रोडक्ट के MVP मानदंडों की जाँच करें:

  • आपके पास 4-5 प्रकार के लक्षित ग्राहक हैं।
  • आपको अपने MVP के प्रकार्यों की समझ है और आप संचालन के सिद्धांत को जानते हैं।
  • आपको एक समस्या मिली है जिसे MVP हल करेगा।
  • आप कम से कम तीन प्रतिस्पर्धियों के उत्पादों के फ़ायदे और नुकसान जानते हैं।
  • आपके पास SWOT विश्लेषण और उपयोगकर्ता का रोड मैप तैयार है।
  • आपने प्रोडक्ट के फ़ंक्शन को सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण से सबसे कम महत्वपूर्ण श्रेणियों में डाला है।
  • आप MVP का दायरा और उसका प्रकार चुन चुके हैं।
  • आपने अल्फ़ा टेस्टिंग को पूरा कर लिया है। 
  • आपने बीटा टेस्टिंग पूरा कर लिया है।
  • आपने फ़ीडबैक जमा कर लिए है।
  • ग्राहक मेन फ़ंक्शन से संतुष्ट थे।
  • आपने फिर से टेस्टिंग करने से पहले ज़रूरी परिवर्तन किए हैं।

MVP और MLP: इन दोनों में क्या अंतर है?

MLP एक न्यूनतम आकर्षक प्रोडक्ट है जो MVP से मिलता जुलता है, लेकिन, उसके विपरीत, इसमें एक अधिक विचारशील उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस और उपयोगकर्ता अनुभव होता है। सीधे शब्दों में कहें, तो यह न केवल ग्राहक की एक विशिष्ट समस्या को हल करता है, बल्कि उसे इसका उपयोग करने की प्रक्रिया में आनंद भी प्रदान करता है। संक्षेप में, MLP, MVP का ही एक उन्नत वर्जन है, जिसका आप मार्किट में प्रमोशन करेंगे, लेकिन उपयोगकर्ता की राय जानने और आगे के टेस्टिंग के लिए।

जबाव दिए गए अंतर के अलावा, MLP और MVP के बीच यह कुछ अंतर है:

  • MVP विकसित करने का लक्ष्य परिकल्पना की पुष्टि या खंडन करना और फीडबैक जमा करना है। MLP का लक्ष्य ग्राहकों के साथ एक भरोसेमंद संबंध स्थापित करना और ग्राहकों के कम्यूनिटी को इकट्ठा करना है।
  • MVP बनाने के लिए न्यूनतम समय, प्रयास और वित्त की आवश्यकता होती है, जबकि MLP को तैयार करने में, किसी पूरे प्रोडक्ट को तैयार करने जितना ही समय लगता है।
  • MVP के विकास के दौरान, UX (उपयोगकर्ता का अनुभव) और डिज़ाइन पर न्यूनतम ध्यान दिया जाता है, क्योंकि मुख्य लक्ष्य सुविधाओं का परीक्षण करना होता है। दूसरी ओर, MLP एक ही समय में आकर्षक डिज़ाइन और सुविधा, दोनों की गारंटी देता है।
  • MVP का उपयोग करने के बाद, ग्राहक प्रोडक्ट के साथ अपनी संतुष्टि के स्तर का मूल्याँकन करते हैं, जबकि MLP का उपयोग करने के बाद, ग्राहक, दोस्तों के साथ अपना अनुभव साझा करने और उन्हें इसको इस्तेमाल करने की सलाह देने के लिए तैयार होता है।

MVP या प्रोटोटाइप?

MVP या प्रोटोटाइप

MVP को प्रोटोटाइप नहीं कहा जा सकता, हालाँकि बहुत से लोग इन दोनों के बीच का अंतर नहीं समझ पाते। यहाँ बताया गया है कि MVP, एक प्रोटोटाइप से कैसे अलग होता है:

  • प्रोडक्ट के न्यूनतम प्रकार्य होते हैं, लेकिन इसे अधूरा नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि यह इन प्रकार्यों के भीतर पूरी तरह से काम करता है और शुरुआत से ही उच्च प्रतिस्पर्धा दिखाता है।
  • प्रोटोटाइप एक विचार के कार्यान्वयन की व्यवहार्यता को साबित करने के लिए बनाया जाता है, लेकिन इसका उपयोग फीडबैक जमा करने या प्रोडक्ट की माँग का विश्लेषण करने के लिए वास्तव में नहीं किया जा सकता है।

MVP के कुछ उदाहरण

अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के बीच MVP के सबसे आकर्षक उदाहरण यहाँ दिए गए हैं जो साबित करते हैं कि यह तकनीक काम करती है:

  1. Uber.  Uber ऐप के पहले वर्जन में ग्राहक केवल ड्राइवरों को ढूँढकर और उनसे संपर्क कर सकते थे। ग्राहकों द्वारा इस आइडिया को स्वीकृत किए जाने के बाद, उबर ने एप्लिकेशन के फ़ंक्शन में सुधार करना शुरू कर दिया और आख़िरी में, किराया चुनने, प्रोफ़ाइल बनाने, राइड की योजना बनाने और बहुत कुछ करने की क्षमता को जोड़ा। इसके अलावा, इन सभी सुविधाओं को केवल उपयोगकर्ताओं की इच्छा से जोड़ा गया था, जिसके लिए MVP चरण में फीडबैक जमा किए गये थे।
  2. Snapchat. इस एप्लिकेशन का शुरुआती वर्जन एक छोटी उपयोगिता की तरह था जिसमें आप अपने दोस्तों को ऐसे संदेश भेज सकते थे, जो पढ़ने के दस सेकंड बाद गायब ही जाते हैं। हालाँकि, स्नैपचैट को 2011 में Apple स्टोर में रिलीज़ किया गया था और जैसे ही पहले रिव्यूज आने शुरू हुए, उनके आधार पर एप्लिकेशन में सुधार किया गया। जैसे मास्क, इमेज शेयरिंग, प्रोफाइल सेटिंग्स इत्यादि।
  3. Airbnb. 2007 में, ब्रायन चेस्की और जो गेबिया को सैन फ्रांसिस्को में एक सम्मेलन में जाना था, लेकिन उन्होंने पाया कि शहर में कोई किफ़ायती आवास के विकल्प नहीं थे। इसलिए उन्होंने परिकल्पना करी कि अन्य लोगों को भी ऐसे ही किराए पर अल्पकालिक आवासों की खोज के लिए एक साइट की आवश्यकता होगी। उनके MVP कन्सीर्ज ने इस परिकल्पना की पुष्टि करने में मदद की, जिसके परिणामस्वरूप एक प्रसिद्ध बहुक्रियाशील साइट बन गई।

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