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नवाचार का प्रसार

नवाचार का प्रसार क्या है

नवाचार के प्रसार का सिद्धांत एक अवधारणा है जो बताती है कि समाज द्वारा नवाचारों को कैसे अनुभव किया जाता है और किस नियमबद्धता के अनुसार उनके प्रसार को तेज किया जा सकता है। यह नियमबद्धता लगभग 60 साल पहले समाजशास्त्री एवरेट रोजर्स द्वारा बनाई गयी थी और किताब -डिफ्यूजन ऑफ इनोवेशन - के प्रकाशन के बाद लोगों ने उस अवधारणा को जाना। किताब में नवाचार के प्रसार को कृषि क्षेत्र के उदाहरण के आधार पर देखा गया है। रोजर्स ने पाया कि कुछ किसान नवाचार के बारे में सीखने और उनका उपयोग करने में सक्रिय रूप से रूचि रखते थे, लेकिन कुछ ने तो खेती करने के कम कामगर तरीकों को बदलने तक का विरोध भी किया।

नवाचार के प्रसार के सिद्धांत को  20 वीं शताब्दी के वैज्ञानिकों द्वारा सराहा गया: इसे भूगोलवेत्ता थॉर्स्टन हेगरस्ट्रैंड और गणितज्ञ फ्रैंक बास के कार्यों में देखा जा सकता है। इस प्रकार ही नवाचार के प्रसार की प्रक्रिया भौगोलिक घटनाओं की मॉडलिंग और बाजार में नए उत्पाद की बिक्री की गतिशीलता को निर्धारित करने वाले मैथमेटिकल फंक्शन्स सिस्टम का आधार बनी। बास मॉडल (या बास कर्व) ने दिखाया कि समय बीतने के साथ अनजान उत्पाद की बिक्री बढ़ती है और इसके चलते शुरुआत में लाभहीन रहें कई उत्पादों को बंद करने से रोका जा सका।

नवाचार का प्रसार सिद्धांत

रोजर्स के सिद्धांत के मुख्य घटक:

  • नवाचार- एक ऐसी अवधारणा  है जो यूज़र्स के लिए किसी नए विचार और तकनीक को स्पष्ट करती हो।
  • यूज़र्स- वे दर्शक या ग्राहक जो नवाचार को अपनाते हैं।
  • जोखिम लेने वाले यूज़र्स का समूह - यह नवाचार का सक्रिय रूप से इस्तेमाल करने वाले यूज़र्स की उस संख्या को कहते हैं जो नवाचार के व्यापक प्रसार को शुरू करने के लिए पर्याप्त हो।
  • नवाचार को स्वीकारने की प्रक्रिया- किसी नए विचार/तकनीक  के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल को स्वीकृति या अस्वीकृति की ओर ले जाने वाली पांच-चरणीय प्रक्रिया।
  • अन्य प्रमुख कारक- नवाचार को अपनाने की प्रक्रिया में भूमिका निभाने वाले कारक। रोजर्स का मानना था कि वे कारक - संचार, सामाजिक व्यवस्था और समय हैं।

रोजर्स यूज़र्स या संभावित ग्राहकों को 5 वर्गों में बांटने की सलाह देते हैं

  • नवचारक - 2.5% से अधिक नहीं;
  • जल्दी ही पीछे चलने वाले- 13.5% से अधिक नहीं;
  • शुरुआती बहुसंख्यक -  34% से अधिक नहीं;
  • बाद में जुड़नेवाले बहुसंख्यक - 34% से अधिक नहीं;
  • देर से आने वाले - 16% से अधिक नहीं।

यह विभाजन दर्शाता है कि उस प्रयोगशाला या कंपनी के बाहर जहाँ नवाचार के जीवन चक्र की शुरुआत होती है, संभावित यूज़र्स का एक बहुत ही छोटा समूह उसका प्रयोगशाला या कंपनी के बाहर इसका उपयोग करना शुरू कर देता है जहां उसे बनाया गया था। किसी नवाचार को अपनाने की गति पूरी तरह से उसके प्रसार के दायरे पर निर्भर करती है। वहीँ ग्राहकों की नवीनता के प्रति ग्रहणशीलता का सीधा संबंध प्रसार की गति के साथ होता  है।

नवाचार के प्रसार सिद्धांत के तहत यूज़र्स द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों को स्वैच्छिक, सामूहिक और आधिकारिक में विभाजित किया गया है। स्वैच्छिक निर्णय किसी एक व्यक्ति द्वारा, सामूहिक- समूह के लोगों द्वारा, आधिकारिक - उन यूज़र्स द्वारा स्वीकार लिए जाते हैं जिनका किसी विशेष सामाजिक समूह पर अधिकार होता है।

नवाचार की प्रसार प्रक्रिया

नवाचार का प्रसार यूज़र्स के जीवन में नवाचार के क्रमिक परिचय के रूप में होता है। एवरेट रोजर्स का मानना ​​​​था कि उसका इस्तेमाल किसी भी मार्केटिंग कम्युनिकेशन में किया जा सकता है तथा उसे सामाजिक संस्थानों और विज्ञान पर प्रोजेक्ट किया जा सकता है।

नवाचार प्रसार के चरण:

  • चरण 1. जागरूकता- मार्केटिंग के नज़रिये से यह लक्षित दर्शकों के बीच किसी उत्पाद या सेवा के बारे में जागरूकता बढ़ाने का चरण है। यानी स्टैण्डर्ड मार्केटिंग टूल्स का इस्तेमाल करके आप मात्र नवाचार के बारे में बताते हैं।
  • चरण 2. विश्वास दिलाना - नवाचार के बारे में कोई भी कहानी या प्रचार-प्रसार आपके प्रस्ताव के फायदों और उपयोगिताओं को बताता है। विश्वास दिलाने के चरण में केवल यह बताना ही ज़रूरी नहीं होता कि उत्पाद यूज़र को परिचित समाधानों से अलग क्या देता है, बल्कि यह भी कि उत्पाद के प्रति यूजर की रुचि में बढ़ोतरी करता है।
  • चरण 3. समाधान- यह नवाचार और उसके इस्तेमाल के अध्ययन में यूज़र की सक्रिय भागीदारी को कहते हैं। एक संभावित खरीदार आपके नवाचार का मूल्यांकन करता है और यह समझने की कोशिश करता है कि वह उसके लक्ष्यों और जरूरतों को कैसे पूरा करता है। आप स्टैण्डर्ड सेल्स फ़नल का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन ऐसे लीड मैग्नेट्स का इस्तेमाल करें जो आपके उद्योग के लिए आम नहीं हैं। उदाहरण के लिए, सदस्यता लेने पर उपहार स्वरुप एक वेबिनार (लीड मैग्नेट) देने के बजाय, आप एक छोटा शुल्क लेकर (ट्रिपवायर) एक महीने के लिए लेक्चर्स देखने की पेशकश कर सकते हैं।
  • चरण 4. कार्यान्वयन- उपभोक्ताओं द्वारा किसी नवाचार या उसके किसी रूप के नियमित उपयोग को कहते हैं। यूज़र किसी उत्पाद का परीक्षण करता है, उसे समझना शुरू करता है, और कुछ समय बाद वह आपके नवाचार के बिना अपने जीवन की कल्पना नहीं कर सकता है। किसी ग्राहक को वफादार बनाने और फिर उसे अपने नवाचार का हिमायती बनाने के लिए ज़रूरी है कि आप अपनी सेवा का उच्च स्तर बनाये रखें, अपने नवाचार की लागत को इतना न बढ़ाएं कि वह लक्षित दर्शकों की पहुँच से बाहर हो जाए और एक अनूठा समुदाय बनाएं जो केवल आपके ग्राहकों के लिए ही उपलब्ध हो।
  • चरण 5. पुष्टि- यूज़र सोच-समझकर यह निर्णय लेता है कि वह भविष्य में आपके नवाचार का ही इस्तेमाल करेगा तथा आपके प्रतिस्पर्धियों के उत्पादों की तुलना में उसको प्राथमिकता देगा। पांचवें चरण की विशेषता यह होती है कि उसमें सक्रिय रूप से आपके नवाचार का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है और शुरुआती खरीदार उसके बारे में नए उपभोक्ताओं को सकारात्मक सलाह देने लगता हैं।  

क्या मेरा उत्पाद नवाचार प्रसार से गुज़रेगा?

नवाचार की प्रसार क्षमता का निर्धारण एक साधारण परीक्षण से किया जा सकती है। क्या आपका उत्पाद बाजार के लिए नया है? क्या आपको लगता है कि दर्शक शुरू में उत्पाद को समझ नहीं पाएंगे? क्या आप मार्केटिंग टूल्स के माध्यम से अपने उत्पाद का प्रचार करने वाले हैं? अगर आपने तीनों प्रश्नों का उत्तर हां में दिया है, तो आपके मामले में नवाचार प्रसार का सिद्धांत लागू होता है। अगर आपने किसी एक प्रश्न का उत्तर "नहीं" में दिया है तो रोजर्स के मूल विचार एक सफल मार्केटिंग रणनीति बनाने का आधार बन सकते हैं।

नवाचारों के प्रसार के उदाहरण

नवाचारों के प्रसार का सबसे ज्वलंत उदाहरण किसी नए गैजेट (iPhone, Samsung Galaxy Z Flip), मशीन या तकनीक  (पर्सनल कंप्यूटर, माइक्रोसॉफ्ट), औद्योगिक सामग्री का प्रचार है। इसी सिद्धांत के आधार पर श्रम बाजार के नए आर्थिक प्रोत्साहन (मेहनताना का वेतन में विभाजन, KPI के आधार पर बोनस और की गयी बिक्री की राशि से प्रतिशत देने), कंपनियों के संगठन के रूप, बिल और आधिकारिक आदेश बनते हैं। इस सिद्धांत के अनुसार नवाचार आमतौर पर तकनीकी या संगठनात्मक होते हैं। हालांकि संगठनात्मक नवाचारों के प्रसार की संभावना नवाचारों के औपचारिकरण के उच्च स्तर के कारण सीमित होती है। व्यवहार में इसका मतलब यह हुआ कि नवाचार प्रसार "फ़नल" से मुख्य रूप से तकनीकी स्पेक्ट्रम के नवाचार ही गुज़रते  हैं।

किसी  नए विचार को भी नवाचार का प्रसार भी माना जा सकता है अगर वह ऊपर दिए चरणों से गुजरता है और बाजार में नया है। एक नया उत्पाद जो किसी ऐसे क्षेत्र में हो जो बाजार में मौजूद निर्माताओं द्वारा पहले कब्जा नहीं किया गया हो तो वह भी यूज़र तक पहुंचने के लिए नवाचार के प्रसार "फ़नल" से गुजर सकता है।

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